अजमेर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) द्वारा कांग्रेस को ‘राष्ट्र विरोधी’ बताने वाले बयान ने राजस्थान की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य राजनीतिक बेचैनी और हताशा को दर्शाता है।
गहलोत ने कहा—कांग्रेस पर ऐसे आरोप हास्यास्पद
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि जिस विचारधारा का देश की स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं रहा, वह कांग्रेस जैसी पार्टी पर राष्ट्र विरोधी होने के आरोप लगा रही है। उनका कहना था कि यह न सिर्फ हास्यास्पद है बल्कि राजनीतिक नैतिकता के पतन का भी प्रतीक है। गहलोत के अनुसार कांग्रेस वह पार्टी है जिसने आजादी के आंदोलन का नेतृत्व किया और देश को लोकतांत्रिक ढांचे की दिशा दी। ऐसे में कांग्रेस पर देश को तोड़ने जैसे आरोप लगाना जनता को भ्रमित करने का प्रयास है।
“मोदी को याद रखना चाहिए—प्रधानमंत्री का विरोध देश का विरोध नहीं”
अपनी प्रतिक्रिया में गहलोत ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं को राष्ट्र से बड़ा समझना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी प्रधानमंत्री की नीतियों का विरोध करना राष्ट्र विरोध नहीं होता और ऐसी सोच देश की राजनीतिक संस्कृति के लिए घातक है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने एक सरकारी मंच का उपयोग राजनीतिक हमलों के लिए किया, जबकि जनता उनसे जनहित के मुद्दों पर जवाब की उम्मीद कर रही थी।
गहलोत ने उठाए कई सवाल—राइट टू हेल्थ से लेकर ईआरसीपी तक
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री से कई सीधा सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि क्या केंद्र सरकार राजस्थान की तरह पूरे देश में ‘राइट टू हेल्थ’ लागू नहीं करना चाहती? उन्होंने यह भी पूछा कि गिग वर्कर्स वेलफेयर एक्ट और शहरी रोजगार गारंटी जैसे कानूनों पर प्रधानमंत्री चुप क्यों रहे। गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने ईआरसीपी परियोजना का नाम बदल दिया, लेकिन अब तक इस पर जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। गहलोत के मुताबिक, राजस्थान की जनता इन मुद्दों की सच्चाई समझती है और पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर विकास की उम्मीद करती है।
पेपर लीक कानून पर भी गहलोत का PM पर निशाना
गहलोत ने पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में उनकी सरकार ने एक सख्त कानून बनाया, जिसमें आजीवन कारावास, 10 करोड़ रुपये जुर्माना और संपत्ति जब्ती जैसे प्रावधान शामिल हैं। गहलोत ने कहा कि यह कानून पूरे देश के लिए उदाहरण बन चुका है। ऐसे में केंद्र सरकार को भी देश भर के लिए इसी तरह का कड़ा कानून लाने पर विचार करना चाहिए था, न कि इस मुद्दे पर राजनीति करनी चाहिए थी।
“डबल इंजन नहीं, डबल जीरो साबित हुआ”
गहलोत ने बीजेपी के ‘डबल इंजन सरकार’ के नारे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में राज्य सरकार अपने ही कार्यकाल में हुए ओएमआर शीट घोटाले की जांच कराने का साहस नहीं दिखा पा रही है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान दी गई गारंटियों पर सरकार अभी तक खरी नहीं उतरी है और जनकल्याणकारी योजनाओं को फिर से शुरू करने में भी देरी हो रही है। गहलोत के शब्दों में, राजस्थान में बीजेपी का ‘डबल इंजन’ अब जनता के सामने ‘डबल जीरो’ की तरह साबित हो रहा है।


