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अशोक गहलोत का बड़ा बयान: कांग्रेस की गुटबाजी से कार्यकर्ता कंफ्यूजन में

अशोक गहलोत का बड़ा बयान: कांग्रेस की गुटबाजी से कार्यकर्ता कंफ्यूजन में

मनीषा शर्मा।  पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पार्टी की आंतरिक गुटबाजी और नेताओं के आपसी मतभेदों को खुलकर स्वीकार किया है। गहलोत ने कहा कि इस गुटबाजी का सबसे ज्यादा असर कार्यकर्ताओं पर पड़ता है। वे कंफ्यूजन में रहते हैं कि किस नेता के साथ खड़े हों और किसके पास जाएं। इस कारण पार्टी का जमीनी स्तर पर काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, “जिले से लेकर राज्य स्तर तक कार्यकर्ता यह सोचकर असमंजस में रहते हैं कि अगर किसी नेता के पास जाएंगे तो दूसरे गुट वाले कह देंगे कि यह उनका आदमी है। इसी कन्फ्यूजन में कार्यकर्ता दिल से काम नहीं कर पाता।” गहलोत ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि मतभेद भुलाकर एकजुट हों, क्योंकि यही समय कांग्रेस को मजबूत करने का है।

कांग्रेस के सुनहरे अतीत और वर्तमान स्थिति की तुलना

गहलोत ने कांग्रेस की गिरती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि कभी राजीव गांधी के समय पार्टी के पास 414 सांसद थे। लेकिन आज यह संख्या घटकर 98 तक आ गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर मजबूत नहीं होगी तो बीजेपी का मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चेताया कि आने वाला चुनाव मामूली नहीं बल्कि घमासान होने वाला है।

बीजेपी और आरएसएस पर धनबल का आरोप

गहलोत ने भाजपा और आरएसएस पर तीखे वार किए। उन्होंने कहा कि बीजेपी आज धनबल के दम पर मजबूत हुई है। उनके पास फाइव स्टार दफ्तर हैं, शानदार इमारतें हैं और चुनाव में पैसे के दम पर वोट खरीदे जा रहे हैं। गहलोत ने कहा, “बीजेपी और आरएसएस के पास इतना धन है कि चुनाव के नतीजे आप समझ भी नहीं पाएंगे और पता चलेगा कि परिणाम बदल गए। इसलिए कांग्रेस को कैडर बेस मजबूत करना होगा, बूथ स्तर तक भरोसेमंद कार्यकर्ताओं की टीम खड़ी करनी होगी।”

उपराष्ट्रपति भवन को लेकर विवादित बयान

गहलोत ने संसद और उपराष्ट्रपति भवन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नया उपराष्ट्रपति भवन राजस्थान से जुड़े उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के लिए “मनहूस” साबित हुआ। गहलोत ने तंज कसते हुए कहा कि पहले वाले भवन में सभी उपराष्ट्रपति आराम से कार्यकाल पूरा कर गए, लेकिन नया भवन बनने के बाद धनखड़ मुश्किल से सालभर ही टिक पाए। उन्होंने यह भी कहा कि नए भवन की कोई जरूरत नहीं थी। यह देश की आजादी और लोकतंत्र की विरासत को खत्म करने की कोशिश है।

योजनाओं के नाम बदलने पर भी साधा निशाना

गहलोत ने भाजपा सरकार पर उनकी योजनाओं को बंद करने और नाम बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में गरीबों को मिलने वाला थैला योजना को बंद कर दिया गया। गहलोत ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर सरकार को उनकी फोटो हटानी थी तो हटा देती, पंडित भजनलाल शर्मा की फोटो लगा देती, लेकिन योजना को बंद नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि आज लोग उनसे पूछते हैं कि योजना क्यों बंद कर दी गई। “आजकल लोग कहते हैं खाली थैला पकड़ा दिया। यहां तक कि प्रधानमंत्री की फोटो लगाकर खाली थैले बांटे गए।”

गहलोत का कांग्रेस नेताओं को संदेश

अपने संबोधन में गहलोत ने कांग्रेस नेताओं को यह स्पष्ट संदेश दिया कि समय गुटबाजी और आपसी खींचतान का नहीं है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है और पार्टी की छवि कमजोर हो रही है।

उन्होंने कहा, “बीजेपी को हराने के लिए कांग्रेस को मतभेद छोड़कर एकजुट होना होगा। कार्यकर्ताओं को कंफ्यूजन से बाहर निकालना होगा। बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना होगा। तभी हम आगामी चुनावों में बीजेपी को चुनौती दे पाएंगे।”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का यह बयान कांग्रेस के भीतर गहरी गुटबाजी और असमंजस की स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने न केवल कांग्रेस नेताओं को आईना दिखाया, बल्कि कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे संगठन को मजबूत करने में जुटें। गहलोत ने यह भी चेताया कि बीजेपी और आरएसएस धनबल के जरिए चुनावी मैदान में हावी हो चुके हैं। आने वाला चुनाव मामूली नहीं बल्कि घमासान होगा। ऐसे में कांग्रेस को आत्ममंथन करके संगठन को मजबूती देनी होगी।

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