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जोधपुर दौरे पर अशोक गहलोत का हमला, बोले- बजट से मारवाड़ की उपेक्षा

जोधपुर दौरे पर अशोक गहलोत का हमला, बोले- बजट से मारवाड़ की उपेक्षा

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर दौरे के दौरान राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भविष्य की वैश्विक क्रांति बताते हुए युवाओं और विभिन्न वर्गों से इसे अपनाने की अपील की, वहीं दूसरी ओर हालिया राज्य बजट को निराशाजनक करार देते हुए मारवाड़ क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में कांग्रेस की जीत का दावा भी किया।

एआई को बताया भविष्य की क्रांति

अशोक गहलोत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आयोजित समिट के संदर्भ में कहा कि राजस्थानवासियों को इसमें पूरी रुचि लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई पूरी दुनिया में एक बड़ी क्रांति के रूप में उभर रही है और यह जरूरी है कि राजस्थान इस दौड़ में पीछे न रहे। उनके अनुसार किसान, मजदूर, उद्योग, चिकित्सा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में एआई चमत्कारिक बदलाव ला सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं अपने कार्यों में एआई का उपयोग करते हैं और मानते हैं कि युवा पीढ़ी को तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए। गहलोत ने इसे सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अहम अवसर बताया।

पंचायत चुनावों पर सरकार को घेरा

पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के मुद्दे पर गहलोत ने कहा कि चुनाव समय पर होना संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार निर्देश दे चुके हैं कि चुनाव समय पर कराए जाएं, लेकिन राज्य सरकार ने बिना वजह प्रक्रिया को लंबा खींचा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत के आदेश के बाद अब चुनाव कराने ही पड़ेंगे और कांग्रेस इन चुनावों में सफलता हासिल करेगी।

मारवाड़ की उपेक्षा का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य बजट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा निराशाजनक बजट पहले कभी नहीं आया। उन्होंने विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जालोर, सिरोही और पाली जैसे जिलों में अकाल और सूखे की स्थिति रही है, फिर भी बजट में इन क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए।

उन्होंने राजीव गांधी लिफ्ट योजना के तीसरे चरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य सरकार ने लगभग 1400 करोड़ रुपये खर्च कर काम शुरू कराया था, लेकिन वर्तमान सरकार के दौरान कार्य की गति धीमी पड़ गई है। गहलोत के अनुसार यदि वे केंद्र सरकार की फंडिंग का इंतजार करते रहते तो यह परियोजना शुरू ही नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जोधपुर जिले के गांवों और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार की ओर से उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

बंद पड़ी परियोजनाओं पर सवाल

अशोक गहलोत ने कहा कि कई परियोजनाएं पूरी होने के बावजूद जनता को उनका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने 80 करोड़ रुपये की लागत से बने स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट का जिक्र किया, जो बंद पड़ा है। इसके अलावा सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी और दिगाड़ी, प्रतापनगर, चैनपुरा व मगरा पूंजला में बने अस्पताल भवनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां न तो डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं और न ही आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने फिनटेक यूनिवर्सिटी की इमारत का काम धीमी गति से चलने पर भी सवाल उठाया और पूछा कि इतने बड़े संस्थान के बावजूद जोधपुर की उपेक्षा क्यों की जा रही है।

रिफाइनरी उद्घाटन पर उठाए सवाल

गहलोत ने रिफाइनरी के उद्घाटन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगस्त में उद्घाटन की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में तारीख टाल दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री कई बार जोधपुर आ चुके हैं तो रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री से क्यों नहीं कराया जा रहा। उन्होंने इसे जनता को बार-बार झांसा देने की कोशिश बताया।

विभागीय कामकाज और भुगतान पर नाराजगी

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कई विभागों में कार्य लंबित पड़े हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग पेंशन, छात्रवृत्ति और छात्रों को मिलने वाली स्कूटी योजनाओं का बजट अटका हुआ है। पीएचईडी और पीडब्ल्यूडी के कार्यों का भुगतान नहीं हो रहा, जिससे ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजस्व बढ़ने का दावा किया जा रहा है तो भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा।

सांप्रदायिक हिंसा और फ्रीबीज पर टिप्पणी

राज्यों में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा के सवाल पर गहलोत ने कहा कि यदि सरकारों का एजेंडा इसी दिशा में होगा तो हिंसा की घटनाएं बढ़ेंगी। वहीं चुनाव से पहले कैश ट्रांसफर और फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अदालत की मंशा चुनाव के दौरान धन वितरण पर रोक लगाने की थी। उन्होंने बिहार और तमिलनाडु के उदाहरण देते हुए कहा कि यदि चुनाव से पहले धन या वस्तुएं बांटी जाती हैं और चुनाव आयोग कार्रवाई नहीं करता तो यह लोकतंत्र के लिए घातक है।

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