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अशोक गहलोत SI भर्ती 2021 पर बोले- ‘डबल कैरेक्टर’ सामने आया

अशोक गहलोत SI भर्ती 2021 पर बोले- ‘डबल कैरेक्टर’ सामने आया

मनीषा शर्मा। राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 (Rajasthan SI Exam 2021) को लेकर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद सियासत तेज हो गई है। कोर्ट ने इस भर्ती को रद्द कर दिया और इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने भजनलाल सरकार (Bhajanlal Government) पर बड़ा हमला बोला है। गहलोत ने शनिवार को जयपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस मामले में मौजूदा सरकार और मुख्यमंत्री का ‘डबल कैरेक्टर’ यानी दोहरा चरित्र सामने आ गया है।

गहलोत बोले- सरकार ने खुद फैसला लेने की हिम्मत नहीं दिखाई

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि जब हाई कोर्ट ने सरकार को इस भर्ती पर फैसला लेने का विकल्प दिया था, तब सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। इसके बजाय सरकार ने कोर्ट में एफिडेविट देकर यह कहा कि भर्ती रद्द नहीं की जानी चाहिए। गहलोत का कहना था कि यह सब पेपर लीक करने वालों को बचाने के लिए किया गया।

लेकिन अब जब कोर्ट ने भर्ती रद्द कर दी, तो सरकार इसका स्वागत कर रही है। गहलोत ने कहा, “सरकार ने खुद कोई फैसला लेने की हिम्मत नहीं दिखाई। अब कोर्ट का फैसला आने के बाद वह पीठ पीछे छुप रही है। यह सरकार का दोहरा चरित्र है।”

गहलोत ने अपनी सरकार के फैसलों को किया याद

गहलोत ने इस मौके पर अपनी सरकार के समय लिए गए कड़े फैसलों को भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि जब रीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, तब उनकी सरकार ने बिना देर किए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया। उस समय करीब 35 हजार पद थे। लेकिन बाद में पदों की संख्या बढ़ाकर 50 हजार कर दी गई और दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। गहलोत ने कहा, “हमने पारदर्शिता और युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठाए। अंततः 50 हजार युवाओं को नौकरी मिली और परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई।”

पेपर लीक – ‘देशभर की बीमारी’

गहलोत ने कहा कि पेपर लीक की समस्या केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में फैली हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान की ज्यूडिशरी परीक्षा का पेपर भी आउट हुआ था। इसी तरह गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब में भी पेपर लीक के बड़े मामले सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में पेपर लीक करने वाले गिरोह काम कर रहे हैं और यह समस्या युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए देश का सबसे कड़ा कानून बनाया था।

कड़े कानून और एंटी-चीटिंग सेल का जिक्र

गहलोत ने विस्तार से बताया कि उनकी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए 10 करोड़ रुपये तक की पेनल्टी, आजीवन कारावास और संपत्ति कुर्क करने जैसे प्रावधान किए थे। इसके अलावा, एम.एल. कुमावत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी और एसओजी में विशेष एंटी-चीटिंग सेल भी गठित किया गया था।

उन्होंने कहा, “हमने इस मुद्दे पर कोई कमी नहीं छोड़ी थी। लेकिन मौजूदा सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।”

भजनलाल सरकार को दी नसीहत

अशोक गहलोत ने कहा कि अब यह भजनलाल सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनहित में सही फैसला ले। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है, लेकिन उसे युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर ही कदम उठाना चाहिए।

गहलोत ने कहा, “सरकार को अब तय करना है कि वह अपील में जाती है या नहीं। लेकिन फैसला जनता और अभ्यर्थियों के हित में होना चाहिए।”

हनुमान बेनीवाल और किरोड़ी मीणा पर आरोप

इस दौरान गहलोत ने दो बड़े नेताओं—हनुमान बेनीवाल और किरोड़ी लाल मीणा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों दोस्त हैं और इन दोनों ने उनकी सरकार गिराने की कोशिश की थी।

गहलोत ने आरोप लगाया कि हनुमान बेनीवाल और किरोड़ी मीणा ने हेलिकॉप्टर लेकर राजस्थान का दौरा किया और उनकी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। हालांकि, उनकी सरकार बच गई। गहलोत ने कहा कि इस पर पैसों की भी बात थी, लेकिन उस पर कभी अलग से चर्चा होगी।

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