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राजस्थान में 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों को मंजूरी, 144 करोड़ की स्वीकृति

राजस्थान में 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों को मंजूरी, 144 करोड़ की स्वीकृति

शोभना शर्मा।  राजस्थान सरकार ने पशुपालन क्षेत्र के ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पूरे प्रदेश में पशु चिकित्सा सेवाओं को विश्वसनीय और सुलभ बनाने पर जोर दिया है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने 38 जिलों में 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों के निर्माण को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके लिए कुल 144 करोड़ 15 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पशुधन के उपचार और देखभाल की सुविधाएं बेहतर होंगी।

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर पशुपालन अवसंरचना को मज़बूत करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। सरकार चाहती है कि राज्य के हर कोने में पशुपालकों को चिकित्सा सेवाएँ सरलता और निकटता से उपलब्ध हों, ताकि पशुधन की बीमारियों, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। मंत्री के अनुसार प्रत्येक पशु चिकित्सालय भवन के निर्माण के लिए 46.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है और निर्माण कार्य आरंभ करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

सरकार की मंजूरी के बाद जिन 38 जिलों में नए पशु चिकित्सालय भवन निर्मित किए जाएंगे, उनमें अजमेर, अलवर, बालोतरा, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीग, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, कुचामन सिटी, नागौर, पाली, फलौदी, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरौही, श्रीगंगानगर, टोंक और उदयपुर शामिल हैं। यह बड़े पैमाने पर प्रदेशव्यापी पशु चिकित्सा सुविधा विस्तार योजना की तस्वीर प्रस्तुत करता है।

योजना के अंतर्गत जिलों में निर्माण संख्या भी निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार जयपुर जिले में सर्वाधिक 26 स्थानों पर नए चिकित्सालय भवन बनाए जाएंगे। भीलवाड़ा, पाली और नागौर में 18–18 भवन, झुंझुनूं में 17, जोधपुर में 16, चित्तौड़गढ़ में 14 और बीकानेर, सीकर व कोटपूतली-बहरोड़ में 11–11 भवन बनाए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा अलवर, बांसवाड़ा और चूरू में 10–10 भवन, टोंक व उदयपुर में 09–09, अजमेर, दौसा, जालौर और बालोतरा में 07–07, बाड़मेर, डीग, कोटा, खैरथल-तिजारा और कुचामन में 06–06 भवन बनाए जाएंगे। डूंगरपुर में 05, प्रतापगढ़ व सवाईमाधोपुर में 04–04, बारां, भरतपुर, बूंदी, जैसलमेर, झालावाड़, फलौदी व सिरौही में 03–03 भवन और ब्यावर, करौली, राजसमंद, सलूम्बर व श्रीगंगानगर में 02–02 भवनों का निर्माण किया जाएगा।

पशुपालन मंत्री ने आगे बताया कि ग्रामीण विकास निधि के तहत इन भवनों के निर्माण कार्य को मंजूरी दी गई है और सभी कार्य 31 मार्च 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार न केवल पशुपालकों और किसानों के आर्थिक जीवन को मजबूती देगा बल्कि दुग्ध उत्पादन और पशुधन क्षेत्र की विकास गति को भी बढ़ाएगा। राज्य में पशुपालन आज आजीविका का अहम स्रोत है, इसलिए इस क्षेत्र में अवसंरचना विस्तार सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल प्रदान करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अभी भी पशुओं के उपचार हेतु पर्याप्त स्वास्थ्य ढांचा नहीं है, जिसके कारण बीमारियों के समय पशुपालकों को लंबी दूरी तक यात्रा करनी पड़ती है। नए भवन बनने के बाद पशु चिकित्सा सेवाएं अधिक संगठित, आधुनिक और सुव्यवस्थित तरीके से उपलब्ध होंगी। यह कदम न केवल पशुधन संरक्षण बल्कि पशुपालकों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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