शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर 11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। 14 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे, लेकिन उससे पहले ही यह सीट चर्चाओं में है। कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता और दो बार के मंत्री प्रमोद जैन भाया को मैदान में उतारा है, जबकि नरेश मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। BJP ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, परंतु नरेश मीणा की एंट्री से दोनों प्रमुख दलों के समीकरण बदल गए हैं। खासकर समरावता थप्पड़कांड के बाद मीणा सहानुभूति की लहर पर सवार हैं, जो उनके लिए जनसमर्थन जुटाने में मददगार साबित हो सकती है।
टिकट विवाद से उठा तूफान, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस से टिकट न मिलने पर नरेश मीणा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक टीवी डिबेट में कहा कि उनका टिकट पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आपसी सांठगांठ से काटा। मीणा ने आरोप लगाया कि डोटासरा ने अपने रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियां दिलवाईं और “फर्जी तरीके से” अपने बेटे को RAS अधिकारी बनवाया।
इस बयान ने कांग्रेस खेमे में हलचल मचा दी। जवाब में पार्टी प्रवक्ता यशवंत सिंह शेखावत ने कहा कि “लोकतंत्र में हर कोई चुनाव लड़ सकता है, लेकिन मर्यादा रखनी चाहिए।” इस पर नरेश मीणा भड़क गए और उन्होंने चुनौती दी, “अंता आकर प्रचार करो, मैं भाया को जिताने वालों को तमीज सिखाऊंगा।” इन बयानों के बाद अंता की सियासत और अधिक गरमा गई है। मीणा अब कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मैदान में हैं, जिससे भाया की राह कठिन हो सकती है।
अंता सीट का सियासी इतिहास: हर चुनाव में बदलते समीकरण
अंता विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास हमेशा दिलचस्प रहा है। 2008 में परिसीमन के बाद गठित हुई इस सीट पर अब तक कांग्रेस और BJP के बीच सीधा मुकाबला रहा है।
2008: कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया ने BJP के रघुवीर सिंह कौशल को 29,668 मतों से हराया।
2013: BJP के प्रभूलाल सैनी ने भाया को 3,399 मतों से पराजित किया।
2018: भाया ने जोरदार वापसी करते हुए सैनी को 35,000 वोटों से हराया।
2023: BJP के कंवरलाल मीणा ने प्रमोद जैन भाया को 5,861 वोटों से हराकर जीत दर्ज की।
अब 2025 के उपचुनाव में भाया एक बार फिर कांग्रेस उम्मीदवार हैं, लेकिन नरेश मीणा की निर्दलीय उम्मीदवारी से यह मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है।
जातीय समीकरणों में छिपा है जीत का गणित
अंता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,27,563 मतदाता हैं, जिनमें 1,16,405 पुरुष, 1,11,154 महिलाएं और 4 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यहां माली समाज सबसे बड़ा वोट बैंक है, जिनकी संख्या करीब 40,000 है। इसके अलावा लगभग 30,000 मीणा वोटर, 35,000 SC मतदाता, 8,000 मुस्लिम वोटर, और धाकड़ समाज के हजारों मतदाता भी प्रभावशाली हैं। प्रमोद जैन भाया माली समाज पर मजबूत पकड़ रखते हैं, जबकि नरेश मीणा मीणा समुदाय में लोकप्रिय हैं। समरावता घटना के बाद मीणा समाज में उनके प्रति सहानुभूति बढ़ी है, जो कांग्रेस और BJP दोनों के लिए चिंता का विषय है।
नरेश मीणा का राजनीतिक सफर: छात्र राजनीति से बागी नेता तक
1979 में बारां जिले की अटरू तहसील के नया गांव में जन्मे नरेश मीणा छात्र राजनीति से ही सक्रिय रहे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद वे 2003 में NSUI से राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ (RUSU) के महासचिव बने। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
2023: बारां जिले की छबड़ा सीट से निर्दलीय लड़े और 44,000 से अधिक वोट हासिल किए, लेकिन BJP के प्रताप सिंह सिंघवी से हार गए।
2024: देवली-उनियारा उपचुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़े और 60,000 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। नरेश मीणा का यह प्रदर्शन उन्हें प्रदेश की राजनीति में मजबूत बागी नेता के रूप में स्थापित कर चुका है।
समरावता थप्पड़कांड से मिली पहचान और सहानुभूति
नवंबर 2024 में देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर विरोध के बीच नरेश मीणा ने SDM अमित चौधरी को थप्पड़ जड़ दिया था। यह घटना पूरे राजस्थान में सुर्खियों में आ गई। इसके बाद हुए उपद्रव और आगजनी ने उन्हें “जनता के नेता” की छवि दी। जेल से रिहा होने के बाद मीणा ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां और तेज कर दीं। उनके समर्थकों का कहना है कि “नरेश जनता की आवाज़ हैं, जिन्होंने अफसरशाही के खिलाफ बोलने का साहस दिखाया।” यह घटना अब अंता में उनके लिए सहानुभूति की लहर में बदल गई है, जिससे वे मुख्य मुकाबले में आ गए हैं।
कैसे बिगाड़ सकते हैं नरेश मीणा राजनीतिक समीकरण
अंता उपचुनाव में नरेश मीणा की निर्दलीय दावेदारी ने कांग्रेस और BJP दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस को सबसे बड़ा नुकसान मीणा वोट बैंक के बंटवारे से हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक रूप से कांग्रेस का समर्थक वर्ग रहा है। 2024 के देवली उपचुनाव की तरह अगर नरेश मीणा माली, मीणा और SC मतदाताओं में सेंधमारी करते हैं तो प्रमोद जैन भाया के लिए राह कठिन होगी।BJP के लिए भी वे एक बड़ा फैक्टर बन सकते हैं, क्योंकि उनकी लोकप्रियता युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ रही है। अगर BJP किसी कमजोर उम्मीदवार को उतारती है तो नरेश वोटों का विभाजन कर बीजेपी की जीत को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कांग्रेस के लिए मुश्किल, BJP के लिए गणितीय चुनौती
कांग्रेस के लिए अंता सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई है, क्योंकि प्रमोद जैन भाया पार्टी के पुराने चेहरों में से एक हैं। BJP इस सीट को बचाने के लिए रणनीति बनाने में जुटी है, लेकिन नरेश मीणा की बागी छवि और जनाधार ने खेल को जटिल बना दिया है। मौजूदा हालात में मुकाबला त्रिकोणीय और अप्रत्याशित हो गया है, जिसमें कोई भी पार्टी जीत की गारंटी नहीं दे सकती।


