मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। बारां जिले की अंता विधानसभा सीट (Anta Assembly Constituency) पर होने वाले उपचुनाव में अब मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा (Naresh Meena) को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का खुला समर्थन मिल गया है। केजरीवाल के इस समर्थन ने राजस्थान के इस छोटे से विधानसभा क्षेत्र को राष्ट्रीय राजनीतिक फोकस में ला दिया है। अब मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि एक त्रिकोणीय चुनावी जंग में तब्दील हो चुका है।
केजरीवाल के ट्वीट ने बदला समीकरण
मंगलवार को नरेश मीणा ने ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट कर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल से समर्थन की मांग की थी। उन्होंने लिखा था कि वे “जनहित, युवाओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ” लड़ाई लड़ रहे हैं और चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी उनके साथ खड़ी हो।
कुछ ही घंटों में अरविंद केजरीवाल ने जवाब देते हुए लिखा— “नरेश जी, आम आदमी पार्टी पूरी तरह से आपके साथ है।” केजरीवाल के इस ट्वीट के साथ ही राजस्थान में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। #AAPStandsWithNareshMeena हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। इस ट्रेंड ने दिखा दिया कि अब अंता की लड़ाई सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक रंग ले चुकी है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों में मची हलचल
केजरीवाल के समर्थन के बाद अंता सीट का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अब कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि नरेश मीणा पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी के समर्थन से नरेश मीणा को अतिरिक्त राजनीतिक और जनसमर्थन मिल सकता है। इससे कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि नरेश मीणा का प्रभाव खासकर मीणा-धाकड़ समाज और युवा मतदाताओं में ज्यादा है।
15 प्रत्याशी मैदान में, 11 नवंबर को होगी वोटिंग
अंता विधानसभा उपचुनाव 2025 के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें मुख्य मुकाबला तीन ध्रुवों पर सिमट गया है—
कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया, जो हाड़ौती क्षेत्र के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं।
भाजपा से मोरपाल सुमन, जिन्होंने पार्टी के बागी नेताओं को मनाकर अपनी स्थिति मजबूत की है।
निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा, जिन्हें अब आम आदमी पार्टी का खुला समर्थन मिल चुका है।
वोटिंग 11 नवंबर 2025 को होगी और परिणाम का असर न सिर्फ हाड़ौती, बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीतिक दिशा पर पड़ेगा।
कांग्रेस को हो सकता है बड़ा नुकसान
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अंता सीट पर आम आदमी पार्टी के समर्थन से कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान हो सकता है। नरेश मीणा का कांग्रेस से पुराना नाता रहा है और स्थानीय स्तर पर उनका जनाधार भी मजबूत है। विशेषज्ञों के अनुसार, केजरीवाल का समर्थन मिलने के बाद शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाता, जो “बदलाव” और “स्वच्छ राजनीति” के समर्थक हैं, अब नरेश मीणा की ओर झुक सकते हैं। इससे कांग्रेस का वोट बैंक बिखर सकता है और इसका अप्रत्यक्ष फायदा भाजपा को मिल सकता है।
भाजपा ने शुरू किया माइक्रो मैनेजमेंट
दूसरी ओर, भाजपा ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया है। सोमवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि खत्म होने के बाद भाजपा ने अपने बागी नेताओं को मनाने में सफलता हासिल की। पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल समेत 5 बागी प्रत्याशियों ने नामांकन वापस ले लिया और भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सुमन को समर्थन देने की घोषणा की। इससे भाजपा का अंदरूनी संकट कुछ हद तक थम गया है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा— “हमने बूथ स्तर से लेकर सेक्टर स्तर तक की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति तैयार की है। संगठन पूरी तरह से एकजुट है और जनता के बीच प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नीतियों को लेकर जा रहा है।”
मीणा का जनाधार और ‘आप’ की रणनीति
नरेश मीणा ने हाल के वर्षों में अपने जनाधार को मजबूत किया है, खासकर युवाओं और किसान समुदाय में। उनका सीधा और आक्रामक भाषण शैली उन्हें भीड़ में अलग पहचान दिलाती है। आम आदमी पार्टी के समर्थन के बाद अब उनके चुनावी अभियान में दिल्ली मॉडल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार जैसे मुद्दे भी शामिल किए जा रहे हैं। राजस्थान में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि वे अंता में डोर-टू-डोर प्रचार करेंगे और जनता को बताएंगे कि “मीणा ही बदलाव की सच्ची आवाज़” हैं।
राजनीतिक रूप से अहम है अंता सीट
अंता विधानसभा सीट बारां जिले की सबसे प्रमुख सीटों में से एक है, जो हाड़ौती क्षेत्र की राजनीति का तापमान तय करती है। इस सीट से पहले कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया विधायक रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां पर बढ़त हासिल की थी, लेकिन अब उपचुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अंता सीट का परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। अगर नरेश मीणा जैसे निर्दलीय उम्मीदवार को अच्छा प्रदर्शन मिलता है, तो यह “तीसरे विकल्प” की राजनीति को बल दे सकता है।
त्रिकोणीय मुकाबले में दिलचस्प मोड़
अंता उपचुनाव अब एक साधारण सीट की लड़ाई नहीं रह गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच परंपरागत मुकाबले में अब आम आदमी पार्टी के समर्थन से नरेश मीणा तीसरे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं। केजरीवाल के समर्थन ने इस उपचुनाव को नई दिशा दे दी है — जहां एक ओर भाजपा संगठित रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने में लगी है। अब सबकी निगाहें 11 नवंबर पर टिकी हैं, जब अंता की जनता यह तय करेगी कि क्या इस बार सत्ता की कहानी वही पुरानी होगी या राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।


