मनीषा शर्मा। राजस्थान में पिछले दिनों जिस खांसी की दवा (Cough Syrup) को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, उस पर अब सरकार ने जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से करवाई गई लैब टेस्टिंग में यह दवा पूरी तरह से सुरक्षित और मानकों पर खरा पाई गई है। दरअसल, सीकर और भरतपुर जिलों में डेक्सट्रोमेथारपन हाइड्रोब्रोमाइड युक्त खांसी का सीरप पीने के बाद कई बच्चों के बीमार होने और दो बच्चों की कथित मौत के मामले सामने आए थे। इस घटना ने राज्यभर में हलचल मचा दी थी। सवाल उठे कि क्या यह दवा बच्चों के लिए असुरक्षित है। सरकार ने तुरंत दवा के वितरण पर रोक लगाकर कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे।
6 बैच की जांच में सभी नमूने सही
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दवा के छह अलग-अलग बैच की जांच करवाई। यह सैंपल सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर समेत कई जिलों से लिए गए और ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट की लैब में भेजे गए। शुक्रवार को आई रिपोर्ट में साफ कहा गया कि सभी बैच में दवा के सॉल्ट और केमिकल्स मानक मात्रा में पाए गए हैं। किसी भी सैंपल में खराबी या गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई। यानी जिन दवाओं को बच्चों की बीमारी और मौत का कारण माना जा रहा था, वे तकनीकी रूप से सुरक्षित थीं।
बच्चों की मौत के बाद उठे थे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ था कि क्या खांसी की दवा ही बच्चों की मौत का कारण बनी? सीकर और भरतपुर जिलों से सामने आए मामलों में एक-एक बच्चे की जान गई थी और चार से अधिक बच्चे बीमार हुए थे। इन्हीं घटनाओं के बाद लोगों में दवा को लेकर डर और गुस्सा फैल गया। सरकार ने दवा के वितरण को तत्काल प्रभाव से रोकते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी। कंपनी की बनाई अन्य दवाओं के भी सैंपल उठाए गए और लैब भेजे गए।
सीकर सीएमएचओ का दावा – खांसी की दवा से नहीं हुई मौत
सीकर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया कि खांसी की दवा बच्चे की मौत का कारण नहीं बनी। उन्होंने कहा कि जिस बैच की दवा को लेकर यह दावा किया जा रहा है, वह बैच तो झुंझुनूं जिले में सप्लाई ही नहीं हुआ था। ऐसे में यह कहना कि खांसी के सिरप से मौत हुई है, तथ्यों के विपरीत है।
हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खींवसर का बयान
राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि खांसी की दवा में कोई खराबी नहीं है। उन्होंने बताया कि विभाग ने पूरी पारदर्शिता से दवा के सैंपल लेकर सरकारी लैब में जांच करवाई और रिपोर्ट में सब कुछ सही और स्टैंडर्ड पाया गया। मंत्री ने साफ किया कि राज्य सरकार अपने स्तर पर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्क है और जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दवा कंपनी पर से हटे संदेह के बाद भी जांच जारी
भले ही रिपोर्ट में दवा सुरक्षित बताई गई है, लेकिन सरकार ने कंपनी और वितरण तंत्र की अलग से जांच जारी रखने की बात कही है। ताकि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही की गुंजाइश न रहे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जनता की सुरक्षा के लिए नियमित रूप से दवाओं के बैच की जांच होती रहेगी। साथ ही, इस मामले से जुड़े हर पहलू को गंभीरता से लिया जाएगा।
जनता के बीच अभी भी सवाल
हालांकि रिपोर्ट आने के बाद दवा कंपनी और विभाग को राहत मिली है, लेकिन आम जनता के बीच सवाल अभी भी बाकी हैं। लोगों का कहना है कि जब बच्चों की मौत हुई तो उसके पीछे असली कारण क्या था? क्या यह केवल संयोग था कि बच्चों ने दवा पी और उसके बाद बीमार हो गए? सरकार ने कहा है कि बच्चों की मौत के पीछे वास्तविक कारण जानने के लिए चिकित्सकीय स्तर पर अलग जांच की जाएगी और सच्चाई सामने लाई जाएगी।


