शोभना शर्मा। जयपुर में कक्षा चार की छात्रा अमायरा की मौत के मामले में राजस्थान शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग की ओर से प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में स्कूल प्रबंधन से सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया है। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो स्कूल के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) रामनिवास शर्मा की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, दस्तावेजों की जांच की और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत आकलन किया। जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों और शिक्षा मंत्री को सौंपे जाने के बाद अब औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।
7 दिन में जवाब नहीं तो रद्द हो सकती है एनओसी
शिक्षा विभाग द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि स्कूल प्रबंधन सात दिन के भीतर संतोषजनक और तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत नहीं करता है तो नीरजा मोदी स्कूल की एनओसी रद्द की जा सकती है। इसके साथ ही विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए यह भी कहा है कि निजी स्कूलों को नियमों के अनुसार सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे बच्चों की जान के लिए खतरा बन सकती है।
जांच रिपोर्ट में उजागर हुईं गंभीर खामियां
जांच समिति की रिपोर्ट में स्कूल प्रशासन की कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में स्कूल प्रबंधन ने घोर उदासीनता बरती। स्कूल परिसर में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी और सहायिकाएं तैनात नहीं पाई गईं, जो छोटे बच्चों की आवाजाही पर नजर रख सकें।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि घटना के बाद दुर्घटना स्थल को पानी से धोकर साफ कर दिया गया। जांच समिति ने इसे बेहद गंभीर माना है और कहा है कि ऐसा करना साक्ष्यों को नष्ट करने की श्रेणी में आता है, जिससे स्कूल प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
पांच मंजिला भवन में सुरक्षा इंतजाम नदारद
रिपोर्ट के अनुसार नीरजा मोदी स्कूल का डी ब्लॉक पांच मंजिला है, जहां कक्षा आठ तक के छोटे बच्चे पढ़ते हैं। इतनी ऊंची इमारत में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीढ़ियों पर रेलिंग के ऊपर लोहे की जाली होना अनिवार्य था, लेकिन जांच के दौरान यह व्यवस्था नहीं पाई गई।
ग्राउंड फ्लोर पर बने खुले चौक में भी किसी प्रकार की सुरक्षा जाली या अवरोध नहीं था। समिति ने इसे बच्चों के लिए अत्यंत खतरनाक बताया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रत्येक मंजिल पर न तो सुरक्षाकर्मी तैनात थे और न ही कोई सहायिका मौजूद थी, जो यह सुनिश्चित कर सके कि छोटे बच्चे बिना निगरानी के ऊपरी मंजिलों पर न जाएं।
शिक्षा विभाग ने जताई सख्त नाराजगी
शिक्षा विभाग ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है। विभाग का मानना है कि यदि स्कूल प्रशासन ने समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन किया होता तो इस दुखद घटना को रोका जा सकता था।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस मामले को उदाहरण बनाकर अन्य निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा सकती है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी भी छात्र की जान जोखिम में न पड़े।


