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अमित शाह: दिव्यांगों को दया नहीं, दिव्यता का प्रतीक मानें

अमित शाह: दिव्यांगों को दया नहीं, दिव्यता का प्रतीक मानें

मनीषा शर्मा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को जोधपुर दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने रामराज नगर चोखा में पारसमल बोहरा स्मृति महाविद्यालय भवन का शिलान्यास किया और दिव्यांगजन सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण संबोधन दिया। शाह ने कहा कि हमारी सरकार का सिद्धांत है कि “जो कहते हैं, वही करते हैं।” उन्होंने बताया कि उन्हें दिव्यांगों से संबंधित घोषणा करने के लिए कान में कहा गया था, लेकिन सरकार ने यह नियम तय किया है कि घोषणाएं मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री ही करेंगे।

शाह ने कहा कि 2014 में दिव्यांगजन सशक्तिकरण का बजट 338 करोड़ रुपए था, जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर 1313 करोड़ रुपए कर दिया है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि सरकार दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए कितनी गंभीर है।

दिव्यांगजनों के लिए रिकॉर्ड उपलब्धियां

अपने भाषण में अमित शाह ने बताया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने दिव्यांगजनों को लेकर कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं।

  • 35 अंतरराष्ट्रीय और 55 घरेलू हवाई अड्डों को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया गया है।

  • दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और यंत्र देने के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़े गए।

  • पहले 75 वर्षों में केवल 7 लाख लोगों को ही यह सुविधा मिल पाई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे बड़े पैमाने पर बढ़ाया।

शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियां केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक जीवन में उनका असर साफ दिखाई देता है।

सुशीला बोहरा के समाजसेवा कार्यों की सराहना

जोधपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने 85 वर्षीय सुशीला बोहरा की समाजसेवा की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जब उन्हें निमंत्रण मिला, तब उन्हें नहीं पता था कि कितने बड़े व्यक्तित्व से मिलने जा रहे हैं। शाह ने बताया कि सुशीला बोहरा ने पति के निधन के बाद जीवन को सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा, “मेरे जन्म से पहले ही उन्होंने सेवा कार्य शुरू कर दिया था। आज लाखों लोगों के जीवन को रोशन करने में उनका योगदान है।” शाह ने यह भी जोड़ा कि समाजसेवा के माध्यम से बोहरा ने सैकड़ों दृष्टिबाधित लोगों को जीवन में नई दिशा दी है।

दिव्यांगजनों की चुनौतियां और समाज की जिम्मेदारी

अमित शाह ने माना कि हमारे समाज में दिव्यांगजनों के लिए चुनौतियां अभी भी बहुत अधिक हैं। उन्हें शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक स्वीकृति के क्षेत्र में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शाह ने कहा कि जब तक समाज दिव्यांगों को दया का पात्र मानता रहेगा, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि दिव्यांगजनों को दिव्यता का प्रतीक मानना होगा। ईश्वर जब किसी को कुछ कमी देता है तो साथ ही उसमें विशेष क्षमता भी प्रदान करता है। आवश्यकता केवल उस क्षमता को पहचानने और उसे राष्ट्र निर्माण में जोड़ने की है।

देवेंद्र झाझड़िया और पैरालिंपिक उपलब्धियां

अमित शाह ने अपने भाषण में राजस्थान के पैरालिंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझड़िया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झाझड़िया की कहानी पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म तैयार किया है। इसके परिणामस्वरूप भारत ने हाल के तीन पैरालिंपिक खेलों में 52 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जबकि 1960 से 2012 तक देश को केवल 8 पदक मिले थे।

समाज और सरकार का संयुक्त प्रयास जरूरी

अमित शाह ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए समाज, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं यदि मिलकर कार्य करें तो असंभव भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज हमारे दिव्यांगजन न केवल पढ़ाई और नौकरी में बल्कि खेल और उद्योग जगत में भी नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्ति डॉक्टर, कलेक्टर या उद्यमी भी बन सकते हैं। जरूरत है उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनके हाथ थामने की।

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