अजमेर के जयपुर रोड स्थित स्टैच्यू ऑफ ट्रूथ परिसर में बने सार्वजनिक पार्क और ग्रीन एरिया में कथित अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में अजमेर निवासी द्रुपद मलिक ने जिला प्रशासन, अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस स्थान को सार्वजनिक पार्क और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना था, वहां स्थायी निर्माण कर दिया गया है। इससे पार्क का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है और पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ने की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पार्क क्षेत्र में किए गए सभी अवैध और नियम विरुद्ध निर्माणों को हटाकर उसे फिर से उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
केवल प्रतिमा स्थापना की थी अनुमति
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित भूमि को सौंदर्यीकरण और सार्वजनिक उपयोग के उद्देश्य से विकसित करने की अनुमति दी गई थी। उपलब्ध रिकॉर्ड और एमओयू के अनुसार इस स्थान पर केवल प्रतिमा स्थापित करने और परिसर के रखरखाव की अनुमति थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि समय के साथ इस स्थल पर कई स्थायी संरचनाएं खड़ी कर दी गईं, जिससे पार्क का हरित क्षेत्र प्रभावित हुआ है। द्रुपद मलिक ने अपने शिकायत पत्र में कहा है कि इस मामले में प्रशासन द्वारा संयुक्त निरीक्षण कराया जाए और स्थल की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए।
एडीए पहले भी कर चुका है जांच
इस मामले में पहले भी शिकायत सामने आ चुकी है। अजमेर विकास प्राधिकरण ने उस समय जांच कर यह माना था कि संबंधित संस्था ने निर्माण के लिए प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की थी।
जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण अजमेर मास्टर प्लान 2033 के तहत निर्धारित मार्गाधिकार क्षेत्र में किया गया है। इसके बाद प्राधिकरण ने निर्माण कार्य तुरंत प्रभाव से रोकने और मार्गाधिकार में आने वाले हिस्से को हटाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद मौके पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण यथावत बना हुआ है।
पहले भी जारी हो चुका है नोटिस
इस पूरे मामले की शुरुआत भोपों का बाड़ा निवासी संजय भाटी द्वारा दी गई शिकायत से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जयपुर रोड पर अशोक उद्यान के सामने महर्षि दयानंद स्मारक का निर्माण नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि जिस स्थान पर स्मारक का निर्माण हो रहा है, वह अजमेर मास्टर प्लान 2033 के अनुसार 200 फीट मार्गाधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में यहां स्थायी निर्माण होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
इस शिकायत के बाद अजमेर विकास प्राधिकरण ने मामले की जांच शुरू की और प्राधिकृत अधिकारी एवं उपायुक्त के न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया। इसके बाद प्राधिकरण अधिनियम की धारा 67 के तहत नोटिस जारी किया गया था।
संस्था ने दिया था अपना पक्ष
नोटिस के जवाब में महर्षि दयानंद निर्वाण स्मारक न्यास के मंत्री सोम रतन आर्य ने 20 मई 2025 को अपना पक्ष रखा था। उन्होंने बताया था कि संस्था द्वारा किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भूमि प्राधिकरण की है और संस्था ने वहां स्वामी दयानंद सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर स्थल को पर्यावरण अनुकूल लैंडस्केप के रूप में विकसित करने का कार्य किया है।
संस्था का दावा था कि विकास कार्य शुरू करने से पहले संबंधित सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों से चर्चा कर सहमति ली गई थी। उनके अनुसार लैंडस्केप प्रस्ताव के नक्शे पर सहायक नगर नियोजक और टाउन प्लानिंग निदेशक के हस्ताक्षर भी किए गए थे। संस्था का यह भी कहना था कि मुख्य निर्माण प्रतिमा और चित्र संग्रहालय हॉल का है, जो मुख्य मार्ग के डिवाइडर से लगभग 150 फीट की दूरी पर स्थित है।
जांच रिपोर्ट में सामने आए निर्माण के तथ्य
एडीए की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि स्मारक परिसर में एंट्रेंस प्लाजा, कैफेटेरिया, कमरे, अंडरग्राउंड वाटर टैंक और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें से कुछ निर्माण सड़क मार्गाधिकार क्षेत्र में भी पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 190 वर्गमीटर भूमि पर निर्माण मार्गाधिकार क्षेत्र के भीतर किया गया है, जबकि पूरे परिसर में बने अन्य निर्माणों का कुल क्षेत्रफल लगभग 1908 वर्गमीटर बताया गया है।
इसके अलावा लोअर भूतल पर ऑडिटोरियम और भूतल पर प्रतिमा तक पहुंचने के लिए पक्का मार्ग भी बनाया गया है। पश्चिम दिशा में टॉयलेट ब्लॉक, निवास कक्ष, रसोई और अन्य संरचनाएं भी निर्मित की गई हैं।
निर्माण हटाने के दिए गए थे निर्देश
अजमेर विकास प्राधिकरण के उपायुक्त सूर्यकांत शर्मा ने 9 मई 2025 को जारी आदेश में कहा था कि 18 जनवरी 2022 को हुए एमओयू की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया था कि संभागीय आयुक्त द्वारा केवल प्रतिमा स्थापना की अनुमति दी गई थी, जबकि मौके पर अन्य निर्माण बिना स्वीकृति के किए गए हैं।
प्राधिकरण ने संस्था को निर्देश दिया था कि निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया जाए और मार्गाधिकार में आने वाले हिस्से को 15 दिन के भीतर स्वयं हटाया जाए। साथ ही प्रभावित सड़क क्षेत्र को खाली करने के लिए भी कहा गया था।
शिकायतकर्ता ने की कार्रवाई की मांग
अब द्रुपद मलिक ने अपनी शिकायत में प्रशासन से दोबारा कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पार्क क्षेत्र में हुए सभी अनधिकृत निर्माणों को हटाकर मलबा साफ किया जाए और स्थल को फिर से हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि इस मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले में अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त नित्या के. से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन का कोई जवाब नहीं मिला। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पार्क क्षेत्र को लेकर चल रहा विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।


