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अजमेर के 100 साल पुराने मोइनिया इस्लामिया स्कूल का नाम बदला, अब ‘राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय’

अजमेर के 100 साल पुराने मोइनिया इस्लामिया स्कूल का नाम बदला, अब ‘राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय’

अजमेर शहर के स्टेशन रोड स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने राजकीय मोइनिया इस्लामिया स्कूल का नाम आधिकारिक रूप से बदल दिया गया है। शिक्षा विभाग बीकानेर की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब यह विद्यालय ‘राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय’ के नाम से जाना जाएगा। इस निर्णय के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। यह स्कूल लंबे समय से शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल रहा है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। नाम परिवर्तन को लेकर पिछले कई महीनों से मांग और विरोध दोनों पक्षों की गतिविधियां सामने आ रही थीं।

भाजपा महिला मोर्चा की मांग और विभागीय आदेश

करीब दस महीने पहले शहर भाजपा महिला मोर्चा ने विद्यालय का नाम बदलने की मांग उठाई थी। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा गया था और शिक्षा मंत्री के नाम जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भी प्रेषित किया गया था।

इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग बीकानेर ने नाम परिवर्तन का आदेश जारी किया। देवनानी ने कहा कि राज्य में स्कूलों के नाम सनातन संस्कृति के अनुरूप रखे जा रहे हैं और इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग के आदेश के बाद विद्यालय के नए नाम को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

अंजुमन कमेटी की प्रतिक्रिया

नाम परिवर्तन के फैसले पर अंजुमन कमेटी ने आपत्ति जताई है। कमेटी के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि नाम बदलने से न तो इस्लाम का वजूद समाप्त होता है और न ही मुसलमानों की पहचान खत्म होती है। उन्होंने इसे समय का बदलाव बताते हुए कहा कि इतिहास और विरासत को कोई आदेश समाप्त नहीं कर सकता। चिश्ती ने यह भी कहा कि यदि विद्यालय के विकास के लिए कोई पहल करनी थी तो उसे अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया जा सकता था, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर अवसर मिलते। उनके अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों में सुधार अधिक महत्वपूर्ण विषय है।

सामाजिक और राजनीतिक विमर्श तेज

विद्यालय के नाम परिवर्तन ने अजमेर में एक व्यापक बहस को जन्म दिया है। समर्थकों का कहना है कि राज्य सरकार अपनी सांस्कृतिक नीतियों के अनुरूप संस्थानों के नाम तय कर रही है, जबकि विरोध करने वाले इसे ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। शहर में यह स्कूल दशकों से शिक्षा का केंद्र रहा है और यहां विभिन्न समुदायों के छात्र अध्ययन करते हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि प्रशासनिक दृष्टि से आदेश जारी होने के बाद नया नाम प्रभावी हो चुका है।

आगे की स्थिति पर नजर

फिलहाल विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं। प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की बाधा की सूचना नहीं है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस निर्णय का सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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