मनीषा शर्मा, अजमेर। राजस्थान के स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा शनिवार को अजमेर पहुंचे, जहां उन्होंने शहरी सेवा शिविरों का निरीक्षण किया। इन शिविरों में नागरिकों की समस्याओं का निस्तारण और विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। मंत्री ने इस दौरान जनता से सीधा संवाद किया और प्रशासनिक कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
खर्रा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ये शिविर आमजन को राहत देने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार जनता को सुविधाएं देने के लिए शिविर लगा रही है, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार ने इन्हें सरकारी संपत्ति लूटने का जरिया बना दिया था। यही दोनों सरकारों के बीच सबसे बड़ा फर्क है।”
जनता को सीधे लाभ पहुंचाने की पहल
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि शहरी सेवा शिविर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में नागरिकों से विभिन्न योजनाओं और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि अधिकतर आवेदनों का निपटारा समय-सीमा में किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी कारण से अधिक आवेदन लंबित रहते हैं, तो उन्हें तय समय के बाद भी प्राथमिकता से निपटाया जाएगा ताकि किसी को परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य जनता की समस्याओं को मौके पर हल करना है। कई जगहों पर ऐसा देखने को मिला कि नागरिक शिकायत लेकर नहीं आए, क्योंकि अधिकारियों ने समय रहते समस्याओं का समाधान कर दिया था। मंत्री ने इसे सकारात्मक संकेत बताया।
अजमेर में हुआ पट्टा वितरण
शास्त्री नगर स्थित शिविर में मंत्री खर्रा ने आवासीय पट्टों का वितरण भी किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति को उसका वैध हक दिलाना है। शिविरों के माध्यम से अब किसी को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे लोगों के घर तक पहुंचाया जा रहा है।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे इन शिविरों को सिर्फ औपचारिकता न मानें, बल्कि वास्तविक जनता की जरूरतों पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिविरों की सफलता तभी मानी जाएगी जब आम नागरिकों को वास्तविक राहत मिले।
विवाद के बीच मंत्री का सख्त रुख
शिविर के दौरान एक व्यक्ति ने मंत्री से शिकायत की कि “आज की तारीख में पृथ्वीराज नगर में लैंड ऑफ लैंड के अंतर्गत 105 पट्टे अब भी लंबित हैं, लेकिन अजमेर विकास प्राधिकरण ने अब तक जारी नहीं किए।” इस पर मौके पर थोड़ी देर के लिए माहौल गरम हो गया। लोगों के समझाने के बाद मामला शांत हुआ।
मंत्री खर्रा ने इस दौरान स्पष्ट कहा कि वे अनावश्यक जुमलेबाजी और दबाव की राजनीति में विश्वास नहीं करते। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “फैलने से मेरे यहां काम नहीं होगा। भगवान ने मुझे इतनी बुद्धि दी है कि मैं सही और गलत में फर्क कर सकता हूं। कोई भी व्यक्ति दवाब बनाकर काम नहीं निकलवा सकता।” इस बयान के बाद उपस्थित लोगों ने मंत्री की स्पष्टवादिता की सराहना की और कहा कि इस प्रकार का रुख प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने में मदद करेगा।
शिविरों से जनता को मिली राहत
मंत्री खर्रा ने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से जनता को विभिन्न योजनाओं जैसे आवास योजना, पट्टा वितरण, पेंशन योजनाएं, जल निकासी और शहरी विकास संबंधी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन शिविरों में आने वाले प्रत्येक नागरिक को संतुष्ट होकर वापस भेजें।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जनता से किया गया वादा निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। “राज्य सरकार की यह नीति है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। जो लोग पहले उपेक्षित थे, उन्हें अब प्राथमिकता से लाभ दिया जा रहा है।”
कांग्रेस सरकार पर हमला
अपने संबोधन के दौरान झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने शिविरों को जनता की सेवा के बजाय राजनीतिक लाभ का साधन बना दिया था। उन्होंने कहा कि “हमारे शिविर जनता के लिए हैं, राजनीति के लिए नहीं। कांग्रेस ने शिविरों को सरकारी संपत्ति लूटने का जरिया बना दिया था, लेकिन अब यह सिस्टम पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर चल रहा है।”


