मनीषा शर्मा। अजमेर शहर का चर्चित पर्यटन स्थल “सेवन वंडर्स” अब इतिहास बन चुका है। आनासागर झील के ग्रीन बैल्ट और वेटलैंड क्षेत्र में बने इन सात अजूबों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने छह दिन तक चली कार्रवाई में क्रमवार सभी प्रतिमाओं और संरचनाओं को तोड़ दिया। फिलहाल मलबा हटाने का काम जारी है।
11 करोड़ से बने, 2 साल में तैयार हुए अजूबे
साल 2022 में अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने लगभग 11 करोड़ रुपए की लागत से सेवन वंडर्स का निर्माण कराया था। इसमें विश्व के सात अजूबों की प्रतिकृतियां बनाई गई थीं। इनमें रोम का कोलोसियम, मिस्र का पिरामिड, अमेरिका का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, ब्राज़ील का क्राइस्ट द रिडीमर, पेरिस का एफिल टॉवर, इटली की झुकी हुई मीनार और भारत का ताजमहल शामिल थे। यह प्रोजेक्ट अजमेर के पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन इसकी लोकेशन को लेकर शुरुआत से ही विवाद खड़ा हो गया।
कोर्ट ने दिया अवैध निर्माण हटाने का आदेश
आनासागर वेटलैंड और ग्रीन बैल्ट क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। यहां स्थायी निर्माण को लेकर पहले भी कई बार आपत्तियां उठ चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अशोक मलिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए इन अजूबों को अवैध घोषित किया और 17 सितंबर 2025 तक इन्हें पूरी तरह हटाने का आदेश दिया। इसी आदेश के तहत ADA ने 12 सितंबर से कार्रवाई शुरू की।
इस तरह हुई कार्रवाई
12 सितंबर: सबसे पहले रोम का कोलोसियम ध्वस्त किया गया।
13 सितंबर: मिस्र का पिरामिड, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और क्राइस्ट द रिडीमर को गिराया गया।
15 सितंबर: एफिल टॉवर को तोड़ा गया।
17 सितंबर: ताजमहल और पीसा की झुकी हुई मीनार को ध्वस्त कर दिया गया।
छह दिन की इस कार्रवाई में सभी सात अजूबों को गिरा दिया गया। अब मलबा हटाने और स्थल को पूर्व स्थिति में लाने का कार्य जारी है।
याचिकाकर्ता का आरोप – कार्रवाई अधूरी
याचिकाकर्ता अशोक मलिक का कहना है कि प्रशासन ने सेवन वंडर्स तोड़ने की कार्रवाई अधूरी छोड़ी है। उनके अनुसार कोर्ट ने न केवल प्रतिमाओं को ध्वस्त करने बल्कि चारदीवारी हटाने और जमीन की खुदाई कर उसे मूल स्वरूप में लाने का आदेश दिया था। लेकिन अब तक चारदीवारी जस की तस खड़ी है और खुदाई का काम भी बाकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन आदेशों की पूरी तरह से पालना नहीं कर रहा।
ADA की चुप्पी
पूरे मामले में अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) पिछले छह दिनों से कोई स्पष्ट बयान देने से बच रहा है। न तो मलबा हटाने की समयसीमा पर कुछ कहा गया है और न ही शेष कार्रवाई को लेकर। इससे स्थानीय नागरिकों और याचिकाकर्ता के बीच असंतोष बना हुआ है।
आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इस केस की अगली तारीख अभी तय नहीं हुई है। पिछली सुनवाई 4 अगस्त को होनी थी, लेकिन केस लिस्टेड नहीं होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत में आगामी सुनवाई में वेटलैंड में हुए अन्य निर्माणों पर भी चर्चा होगी। इनमें करीब 39 करोड़ रुपए की लागत से बने पाथवे, ग्रीन बैल्ट में तैयार आजाद पार्क और गांधी पार्क के निर्माण भी शामिल हैं। इससे साफ है कि अजमेर में वेटलैंड क्षेत्र से जुड़े विवाद लंबे समय तक चर्चा में बने रहेंगे।


