राजस्थान के अजमेर जिले में पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, कानून से ज्यादा दिनों तक बच नहीं सकता। अजमेर पुलिस ने 16 साल से फरार चल रहे आजीवन कारावास के सजायाफ्ता कैदी को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस पूरे ऑपरेशन की खास बात यह रही कि इसमें आधुनिक तकनीक से ज्यादा मानव खुफिया तंत्र और पारंपरिक पुलिसिंग की भूमिका रही। पुलिस ने सीमित संसाधनों और बेहद कम सुराग के बावजूद आरोपी तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।
इस कार्रवाई का नेतृत्व हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देशन में किया गया। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम गठित की और पूरे ऑपरेशन की सीधे निगरानी की। यह मामला चुनौतीपूर्ण इसलिए भी था क्योंकि आरोपी लंबे समय से फरार था, लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और पहचान छिपाने के लिए बार-बार हुलिया बदल रहा था। इसके बावजूद पुलिस टीम ने धैर्य, रणनीति और लगातार प्रयास के बल पर आरोपी को दबोच लिया।
पुलिस लाइन से दो कांस्टेबलों, प्रकाश सिंह बिष्ट और अजय कुमार जाट, को इस कठिन जिम्मेदारी के लिए चुना गया। उनके पास सुराग के नाम पर केवल 16 साल पुरानी एक धुंधली तस्वीर थी, जिसमें आरोपी घनी दाढ़ी में दिखाई दे रहा था। इतने पुराने फोटो और बिना किसी डिजिटल ट्रैकिंग के किसी अपराधी को तलाशना आसान काम नहीं था। लेकिन टीम ने हार नहीं मानी और शून्य से जांच शुरू की।
सबसे पहले पुलिस टीम आरोपी के मूल गांव नाहरपुरा पहुंची, जो जवाजा थाना क्षेत्र में आता है। वहां पूछताछ के दौरान पता चला कि कई वर्षों से किसी ने उसे गांव में नहीं देखा है। गांव से कोई ठोस जानकारी नहीं मिलने पर टीम ने अगला कदम उठाया और राजसमंद जिले के कामलीघाट क्षेत्र में आरोपी के रिश्तेदारों और भाइयों के संपर्कों की पड़ताल शुरू की। पुलिसकर्मियों ने सामान्य लोगों की तरह रहकर कई दिनों तक वहां डेरा डाला, ताकि किसी को शक न हो और जानकारी जुटाई जा सके।
कई दिनों तक लगातार निगरानी और पूछताछ के बावजूद शुरुआत में कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लगा। इसके बाद पुलिस ने अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। स्थानीय स्तर पर सूचनाएं जुटाने के दौरान खबर मिली कि आरोपी ने अपनी पहचान बदल ली है। उसने दाढ़ी-मूंछ कटवा ली है, सिर मुंडवा लिया है और फर्जी नाम से मजदूरी या मिस्त्री का काम कर रहा है। बताया गया कि वह ‘रामजी दया’ नाम से लोगों के बीच रह रहा था ताकि कोई उसे पहचान न सके।
नई सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के संभावित ठिकाने खरावड़ी गांव में दबिश दी। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी को भनक लग गई और वह वहां से फरार हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने मोबाइल फोन बंद कर दिया और गुजरात की ओर निकल गया। आमतौर पर ऐसे मामलों में आरोपी का पता लगाना और मुश्किल हो जाता है, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा नहीं छोड़ा।
एसपी के निर्देश और हौसला बढ़ाने के बाद टीम ने फिर से जाल बिछाया। लगातार स्थानीय सूचनाएं इकट्ठी की गईं। इसी दौरान पता चला कि आरोपी दोबारा राजस्थान लौट आया है, लेकिन गिरफ्तारी के डर से वह स्थायी ठिकाने पर नहीं रह रहा। सूचना के अनुसार वह दिन में श्मशान घाटों, पुराने मंदिरों, सुनसान खेतों और वीरान इलाकों में छिपकर समय बिताता था, जबकि रात में इधर-उधर ठहरता था। यह तरीका उसने पुलिस से बचने के लिए अपनाया था।
पुलिस टीम ने उसके मूवमेंट पर लगातार नजर रखी और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी। आखिरकार विश्वसनीय सूचना मिली कि आरोपी छापली गांव में एक दुकान पर बैठा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और इलाके की घेराबंदी कर दी। आरोपी को भागने का मौका नहीं मिला और उसे मौके पर ही पकड़ लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद भी आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने खुद को ‘जीतू’ नाम का व्यक्ति बताया और पहचान छिपाने का प्रयास किया। लेकिन लगातार पूछताछ और साक्ष्यों के सामने वह ज्यादा देर टिक नहीं सका। आखिरकार उसने स्वीकार किया कि वह करण सिंह उर्फ कन्ना सिंह रावत है और लंबे समय से फरार चल रहा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और 16 वर्ष पहले फरार हो गया था। तब से वह लगातार अलग-अलग स्थानों पर रहकर कानून से बचने की कोशिश कर रहा था। इतने लंबे समय तक फरारी काटने के बाद उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी नेटवर्क या डिजिटल ट्रेसिंग पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मानव खुफिया तंत्र, स्थानीय जानकारी और पारंपरिक जांच पद्धति का प्रभावी उपयोग किया गया। दो पुलिसकर्मियों ने अनजान भौगोलिक क्षेत्रों में जाकर, बिना पहचान उजागर किए, लगातार प्रयास किए और अंततः सफलता हासिल की।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अजमेर लाया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए सिविल लाइन थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। अब उससे जुड़े पुराने रिकॉर्ड, फरारी के दौरान की गतिविधियों और संभावित सहयोगियों के बारे में पूछताछ की जाएगी।


