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अजमेर दरगाह केस की सुनवाई टली, अब 21 फरवरी को होगी अगली तारीख

अजमेर दरगाह केस की सुनवाई टली, अब 21 फरवरी को होगी अगली तारीख

मनीषा शर्मा, अजमेर।  अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे और एएसआई सर्वे की मांग से जुड़ा संवेदनशील मामला एक बार फिर टल गया। शुक्रवार को सिविल कोर्ट में निर्धारित सुनवाई वकीलों के वर्क सस्पेंड रहने के कारण नहीं हो सकी। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली तारीख 21 फरवरी निर्धारित कर दी है।

सुनवाई के दौरान हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता, पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा और हाईकोर्ट के अधिवक्ता संदीप शर्मा अदालत परिसर में मौजूद रहे। इस बीच कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस ने किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया, जबकि सीओ शिवम जोशी के अलावा दो थानों के थाना अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

मामला क्या है

याचिकाकर्ता विष्णु गुप्ता ने अदालत में आवेदन दायर कर दargah परिसर में कथित रूप से मौजूद शिव मंदिर का एएसआई से सर्वे कराने और वहां पूजा-अर्चना की अनुमति दिए जाने की मांग की है। इस याचिका का मुस्लिम पक्ष अंजुमन कमेटी लगातार विरोध कर रहा है। कमेटी का कहना है कि यह मामला सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास है और साथ ही 1991 के प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध है। उनका तर्क है कि इस तरह के विवाद सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं।

वर्क सस्पेंड होने से प्रभावित हुई कार्यवाही

हाईकोर्ट के वकील संदीप शर्मा के अनुसार, अजमेर में वकीलों के वर्क सस्पेंड कॉल के चलते इस केस की सुनवाई संभव नहीं हो पाई। इसी वजह से अदालत ने अगली तारीख 21 फरवरी तय कर दी है। उन्होंने बताया कि चादर से संबंधित दावा सिविल कोर्ट में वापस लिया जा चुका है, जबकि 7/11 से जुड़े दस्तावेज़ों का मामला अभी पेंडिंग है और इसके जल्द निपटारे की अपेक्षा की जा रही है। वकील का कहना है कि जैसे ही वर्क सस्पेंशन समाप्त होगा, केस की नियमित सुनवाई आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल दोनों पक्षों को अगली तारीख का इंतजार करना होगा।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। अदालत परिसर में आने-जाने वाले लोगों पर निगरानी रखी गई और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलने से रोकने के लिए पुलिस टीमों को सक्रिय रखा गया।

अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट की हर पेशी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया जाएगा। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी प्रक्रिया शांतिपूर्वक और बिना किसी तनाव के आगे बढ़े।

अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब सभी की निगाहें 21 फरवरी को तय अगली तारीख पर टिकी हैं। यह देखा जाना होगा कि उस दिन अदालत इस विवाद पर आगे किस दिशा में बढ़ती है और एएसआई सर्वे व पूजा की अनुमति संबंधी दावों पर क्या रुख अपनाती है।

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