शोभना शर्मा। राजधानी जयपुर में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जयपुर मेट्रो फेज-2 के तहत जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की तैयारियां अब तेज हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत एयरपोर्ट परिसर में एक अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन विकसित किया जाएगा, जो टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और भविष्य में प्रस्तावित टर्मिनल-3 को सीधे मेट्रो से जोड़ेगा। इस परियोजना का उद्देश्य एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे सड़क यातायात पर निर्भरता कम हो और शहर में ट्रैफिक दबाव घटे।
एयरपोर्ट परिसर में हुई अहम समन्वय बैठक
जयपुर एयरपोर्ट को मेट्रो से जोड़ने की योजना को लेकर शनिवार को एयरपोर्ट परिसर में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी और जयपुर एयरपोर्ट प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य मेट्रो और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और निर्माण व संचालन से जुड़े सभी तकनीकी, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं के पहलुओं पर सहमति बनाना रहा।
यात्रियों की सुविधा को केंद्र में रखकर स्टेशन डिजाइन
अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन की योजना इस तरह से तैयार की गई है कि यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनलों तक पहुंचने के लिए न्यूनतम पैदल दूरी तय करनी पड़े। स्टेशन से टर्मिनल-1, टर्मिनल-2 और प्रस्तावित टर्मिनल-3 तक आसान और स्पष्ट मार्ग उपलब्ध कराए जाएंगे। स्टेशन में बैरियर-फ्री मूवमेंट की व्यवस्था होगी, ताकि बुजुर्ग यात्रियों, दिव्यांगजनों और भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अलावा स्पष्ट संकेत प्रणाली, सूचना बोर्ड और डिजिटल गाइडेंस सिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को सहज अनुभव मिल सके।
मेट्रो अलाइनमेंट और प्रवेश-निकास बिंदुओं पर मंथन
बैठक में एयरपोर्ट क्षेत्र के नीचे प्रस्तावित मेट्रो लाइन के अलाइनमेंट, स्टेशन के प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा मौजूदा और भविष्य के टर्मिनल ढांचे के साथ सुरक्षित समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेट्रो निर्माण और संचालन से एयरपोर्ट की मौजूदा गतिविधियों में किसी तरह का व्यवधान न हो। पीक ऑवर्स के दौरान यात्रियों, एयरपोर्ट स्टाफ और सेवा कर्मियों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना बनाने पर भी सहमति बनी। मेट्रो स्टेशन की क्षमता इस तरह रखी जाएगी कि बढ़ती यात्री संख्या को भविष्य में भी आसानी से संभाला जा सके।
सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान
एयरपोर्ट एक उच्च सुरक्षा क्षेत्र होने के कारण इस परियोजना में सुरक्षा पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। डीजीसीए, सीआईएसएफ और बीसीएएस के अधिकारियों ने एविएशन सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मेट्रो स्टेशन और एयरपोर्ट के बीच आने-जाने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग, निगरानी और नियंत्रण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए। मेट्रो और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ संचालन में भी कोई बाधा न आए।
जयपुर की शहरी परिवहन व्यवस्था के लिए अहम कदम
जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के निदेशक (कंपनी अफेयर्स) महेश भूरड़िया ने बताया कि एक ही अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन से सभी एयरपोर्ट टर्मिनलों को जोड़ना जयपुर की शहरी परिवहन व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम होगा। उन्होंने कहा कि सीतापुरा–तोड़ी मोड़ मेट्रो कॉरिडोर के जरिए एयरपोर्ट को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने से सड़क यातायात पर निर्भरता कम होगी। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की बचत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही जयपुर को एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल शहर के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी की ओर कदम
जयपुर देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। एयरपोर्ट को मेट्रो से जोड़ने की यह योजना शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। मेट्रो के जरिए पर्यटक और स्थानीय यात्री सीधे एयरपोर्ट से शहर के विभिन्न हिस्सों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।


