शोभना शर्मा। राजस्थान में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। राजधानी जयपुर समेत कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 250 के पार पहुंच गया है, जो सीधे तौर पर सेहत के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। प्रदूषण का यह स्तर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और दमा व हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए बेहद नुकसानदायक माना जा रहा है।
सुबह-शाम सबसे खराब हालात
मौसम के बदलते मिजाज के साथ प्रदूषण की मार भी बढ़ती जा रही है। सुबह और शाम के समय हवा में धुंध और प्रदूषक कणों की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे हालात और खराब हो जाते हैं। वहीं दोपहर के समय तेज धूप निकलने पर लोग बिना गर्म कपड़ों के घूमते नजर आते हैं, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि मौसम सामान्य है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति में सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि जहरीली हवा बिना महसूस हुए शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।
जयपुर में प्रदूषण की मार
राजधानी जयपुर में प्रदूषण की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। यहां AQI का औसत स्तर 200 से ऊपर पहुंच चुका है और कई इलाकों में यह 250 से भी अधिक दर्ज किया गया। आदर्श नगर में AQI 248, अग्रसेन हाउसिंग सोसायटी में 262, चित्रकूट में 279, गोपालबाड़ी में 270, पुलिस कमिश्नरेट के पास 255, शास्त्री नगर में 257, सुभाष कॉलोनी में 277, विद्याधर नगर में 219 और वार्ड 27 में 255 तक पहुंच गया है। ये सभी आंकड़े सेहत के लिए बेहद हानिकारक माने जाते हैं। खुले इलाकों में भी हवा साफ नहीं हो पा रही है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
राजस्थान के अन्य शहरों की स्थिति
जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों में भी हालात चिंताजनक हैं। अलवर में AQI 246, भीलवाड़ा में 267, चित्तौड़गढ़ में 273, चूरू में 235, सीकर में 232 और टोंक में 234 दर्ज किया गया है, जो गंभीर श्रेणी में आते हैं। भिवाड़ी की स्थिति सबसे खराब बनी हुई है, जहां AQI 448 तक पहुंच गया है, जिसे अति गंभीर स्तर माना जाता है। गंगानगर में 350, उदयपुर में 179, पुष्कर में 154, पाली में 163, कोटा में 178, जोधपुर में 172, जालौर-जैसलमेर में 170 और भरतपुर में हवा अस्वास्थ्यकर स्तर पर बनी हुई है। यहां तक कि माउंट आबू जैसे हिल स्टेशन में भी AQI 161 तक पहुंच गया है।
देश के अन्य शहरों से तुलना
देश के प्रमुख शहरों से तुलना करें तो बेंगलुरु और चेन्नई की हवा अपेक्षाकृत साफ बताई जा रही है, जहां AQI क्रमशः 104 और 113 है। हालांकि नई दिल्ली में AQI 345, पुणे में 253, हैदराबाद में 230 और कोलकाता में 267 दर्ज किया गया है, जो बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदूषण केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि आंखों, त्वचा और पूरे श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहा है।
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ते प्रदूषण ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, मास्क का उपयोग करें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, ताकि प्रदूषण के दुष्प्रभाव से खुद को सुरक्षित रखा जा सके।


