शोभना शर्मा। राजस्थान पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपराध नियंत्रण और निगरानी प्रणाली को और अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। मंगलवार शाम को कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में “AI COP 2025” पहल की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर एसपी देवेंद्र कुमार विश्नोई ने कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए तकनीकी बदलाव की इस पहल का पोस्टर विमोचन किया।
AI COP 2025: तकनीकी युग की ओर पहला कदम
इस परियोजना को TIPSG और RNS ग्रुप ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से प्रारंभ किया है। AI COP 2025 को साधारण परियोजना नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था में तकनीकी क्रांति का प्रतीक माना जा रहा है। इसके तहत पुलिसिंग के कई पुराने तरीकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे अपराधियों पर पहले से ही कड़ी नजर रखी जा सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव हो पाएगी।
पुलिसिंग में AI की भूमिका
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक देवेंद्र विश्नोई ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पुलिस को संवेदनशील मामलों में तेज़ विश्लेषण और निर्णय लेने की बेहतर क्षमता मिलेगी। इससे पुलिस न केवल क्राइम पैटर्न को जल्दी समझ सकेगी, बल्कि ट्रैफिक मॉनिटरिंग, सोशल मीडिया इंटेलिजेंस, और पब्लिक सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका को बेहतर ढंग से निभा सकेगी।
उन्होंने कहा कि AI तकनीक के जरिए पुलिस संभावित अपराध स्थलों और घटनाओं का पूर्वानुमान लगा सकेगी, जिससे अपराध घटित होने से पहले ही कार्रवाई संभव होगी। इस प्रकार, पुलिसिंग अब केवल घटनाओं के बाद की प्रक्रिया नहीं रह जाएगी, बल्कि पूर्व-सक्रिय निगरानी और रोकथाम का माध्यम भी बनेगी।
जनभागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
AI COP 2025 के अंतर्गत पुलिस आम जनता, विशेषकर युवाओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ सहयोग कर रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास और सहभागिता को भी मजबूत किया जाएगा। एसपी विश्नोई ने कहा कि “इस पहल से युवा वर्ग को राष्ट्र सेवा और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।”
साइबर अपराध के प्रति जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम के दौरान साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर भी चर्चा की गई। एसपी विश्नोई ने जनता को सचेत करते हुए कहा कि साइबर अपराध से बचने का सबसे सटीक तरीका है – तकनीकी जानकारी रखना और लालच से बचना। उन्होंने बताया कि आधुनिक साइबर अपराधी नागरिकों को भ्रमित करने के नए तरीके अपनाते हैं, ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
AI से जुड़े प्रशिक्षण होंगे शुरू
TIPSG और RNS ग्रुप के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह परियोजना केवल शुरुआत है। आने वाले महीनों में पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को AI आधारित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की एक टीम को नामित किया जा रहा है, जो पुलिस बल को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने का कार्य करेगी।


