मनीषा शर्मा । राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने एक प्रेस वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिनमें अनुदानित यूरिया का गैर-कृषि कार्यों में दुरुपयोग, छात्रसंघ चुनाव को लेकर हुए विवाद और नरेगा योजना में बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितताएं शामिल थीं। उनके बयानों ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर गहरा असर डाला है, क्योंकि इसमें किसानों, छात्रों और ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।
अनुदानित यूरिया का गैर-कृषि कार्यों में दुरुपयोग
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में अनुदानित यूरिया का बड़े पैमाने पर गैर-कृषि कार्यों में इस्तेमाल हो रहा है, जो न केवल किसानों के हक का हनन है बल्कि कृषि उत्पादन को भी प्रभावित कर सकता है। इस पर रोक लगाने के लिए अब तक 74 नमूने लिए गए और 11 स्थानों पर कार्रवाई की गई है। इस दौरान 621 मीट्रिक टन यूरिया जब्त किया गया और 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साल अच्छी बारिश की वजह से किसानों का रकबा 16% तक बढ़ने की संभावना है। कृषि कार्यों को सुचारू बनाने के लिए डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया गया है। इसके अलावा, ईरान, सऊदी अरब सहित तीन देशों के साथ एमओयू किए गए हैं ताकि उर्वरक आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो।
मंत्री ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कॉल सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की। इसके साथ ही 3 से 17 अक्तूबर तक विकसित कृषि अभियान चलाया जाएगा और जयपुर में एक बड़े किसान सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राज्यभर के किसान अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकेंगे।
किरोड़ी लाल मीणा की छात्रसंघ चुनाव और लाठीचार्ज पर प्रतिक्रिया
राज्य में छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के मामले में कृषि मंत्री ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज नहीं होना चाहिए, लेकिन यदि कोई कानून हाथ में लेता है तो प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में सीकर जाते समय उन पर भी लाठीचार्ज करवाया गया था।
मंत्री ने साफ कहा कि सरकार ने कोर्ट में अपना निर्णय पहले ही सुना दिया है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि सरकार को अशोक गहलोत वाली गलती नहीं दोहरानी चाहिए। उन्होंने एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा, “मुझे तो सरकार कहेगी वो कहना पड़ेगा, जाएं तो जाएं कहां?” यह बयान राज्य की सत्ता और मंत्रियों की स्थिति पर भी एक संकेत माना जा रहा है, जहां पार्टी लाइन से अलग जाकर बोलना मुश्किल होता है।
नरेगा में 2600 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं पर रोक
कृषि मंत्री ने नरेगा योजना में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम का पोर्टल लागू होने से पिछले वित्त वर्ष में 1200 करोड़ और इस वर्ष 1400 करोड़ रुपये के लीकेज को रोका गया है। इस तरह दो साल में कुल 2600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगी है।
उन्होंने मंडरायल पंचायत समिति का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां की एक पंचायत में 26 करोड़ रुपये की स्वीकृति में से केवल 2 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह मामला कांग्रेस शासनकाल का है और इसकी जांच कराई जा रही है। संबंधित बीडीओ, जेईएन, सचिव और सरपंच के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
मंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-वर्क पोर्टल 2.0 शुरू किया गया है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन और फंड के उपयोग पर रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।
किसानों और ग्रामीण विकास के लिए समग्र दृष्टिकोण
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के बयानों से साफ है कि वे कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे तीन अहम क्षेत्रों पर एक साथ फोकस कर रहे हैं। जहां एक ओर वे किसानों को पर्याप्त खाद और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर छात्र आंदोलनों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति संवेदनशीलता भी जता रहे हैं। साथ ही, नरेगा जैसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रम में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए तकनीकी साधनों का उपयोग कर रहे हैं।


