संसद में पारित हुए महिला आरक्षण ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक नई ऊर्जा और उम्मीद देखने को मिल रही है। यह कानून केवल एक संवैधानिक प्रावधान भर नहीं है, बल्कि यह उन लाखों महिलाओं के लिए अवसरों के नए दरवाजे खोलने वाला कदम है, जो अब तक सीमित संसाधनों और सामाजिक बंधनों के कारण राजनीति में अपनी पहचान नहीं बना पाती थीं। इसी बदलते दौर में कुछ ऐसी महिला नेता भी सामने आई हैं, जिन्होंने बिना किसी बड़े राजनीतिक बैकग्राउंड के अपने दम पर पहचान बनाई और यह साबित किया कि अगर मौका मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं पूर्व मेयर कुसुम यादव, जिन्होंने जयपुर की मेयर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उल्लेखनीय काम किए।
एक साधारण परिवार से आने वाली कुसुम यादव की सफलता की कहानी संघर्ष, शिक्षा और दृढ़ निश्चय का उदाहरण है। उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की, साथ ही बी.एड की पढ़ाई भी पूरी की। शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें समाज को समझने और प्रशासनिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद की। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत नगर निगम में पार्षद के रूप में की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए जनता के मुद्दों को समझा और उन्हें हल करने का प्रयास किया। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें जयपुर नगर निगम का मेयर बनने का अवसर मिला, जहां उन्होंने लगभग 14 महीने तक ‘प्रथम नागरिक’ के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
हालांकि उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने जो काम किए, उन्होंने उन्हें एक प्रभावी प्रशासक के रूप में स्थापित कर दिया। जब उन्होंने मेयर का पद संभाला, उस समय नगर निगम आर्थिक रूप से संकट में था और करीब 300 करोड़ रुपए के घाटे में चल रहा था। लेकिन अपने सख्त फैसलों, पारदर्शी प्रशासन और वित्तीय अनुशासन के जरिए उन्होंने इस स्थिति को बदल दिया। महज 14 महीनों में उन्होंने निगम को घाटे से निकालकर करीब 130 करोड़ रुपए के फायदे में पहुंचा दिया। यह उपलब्धि न केवल उनके प्रबंधन कौशल को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि सही नीतियों और इच्छाशक्ति से किसी भी संस्थान को सुधारा जा सकता है।
कुसुम यादव ने शहर के विकास को लेकर कई नवाचार किए। उन्होंने कचरा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कचरे से बिजली बनाने की परियोजना को आगे बढ़ाया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन का भी रास्ता खुला। इसके अलावा उन्होंने निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे का उपयोग कर टाइल्स बनाने की पहल की, जिससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिला बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए। उनके कार्यकाल में निगम की फिजूलखर्ची पर लगाम लगाई गई और टैक्स वसूली की प्रक्रिया को मजबूत किया गया, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
उनकी कार्यशैली की एक खास बात यह भी रही कि उन्होंने विकास कार्यों में आम जनता की भागीदारी को प्राथमिकता दी। उन्होंने शहर को साफ और हरित बनाने के लिए विभिन्न अभियानों में नागरिकों को सीधे जोड़ा, जिससे लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। यही कारण है कि उनके कार्यकाल को आज भी जयपुर के विकास के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जाता है।
कुसुम यादव का मानना है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने में सक्षम हैं। उनके अनुसार, महिलाएं घर की जिम्मेदारियों को जिस कुशलता से संभालती हैं, उसी तरह वे देश और समाज के बड़े दायित्वों को भी संभाल सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज की महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विज्ञान, सेना और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, जो उनकी क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताया है। इस कानून के लिए उन्होंने नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राजनीति में आगे आने के लिए प्रेरित होंगी। उनका मानना है कि भले ही इस कानून के तहत सीमित संख्या में महिलाओं को सीधे अवसर मिले, लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव व्यापक होगा और यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाएगा।
अपनी सफलता के पीछे के कारणों पर बात करते हुए कुसुम यादव ने यह स्वीकार किया कि उन्हें समाज और विशेष रूप से पुरुष सहयोगियों का पूरा समर्थन मिला। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आरक्षण की व्यवस्था नहीं होती, तो उनके लिए इस मुकाम तक पहुंचना बेहद कठिन होता। उनका कहना है कि आरक्षण ने उन्हें वह मंच दिया, जहां वे अपनी क्षमता साबित कर सकीं।


