latest-newsजयपुरदेशराजस्थान

राजस्थान में SIR के बाद 8 लाख वोटर्स को नोटिस, ड्राफ्ट रोल पर बढ़ी आपत्तियाँ

राजस्थान में SIR के बाद 8 लाख वोटर्स को नोटिस, ड्राफ्ट रोल पर बढ़ी आपत्तियाँ

मनीषा शर्मा।  राजस्थान में निर्वाचन विभाग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद 16 दिसंबर को पहला ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किया गया। नियमों के अनुसार, ड्राफ्ट जारी होने के बाद नागरिकों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों को भी एक महीने तक आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। इसी अवधि में विभिन्न पॉलिटिकल पार्टियों ने सक्रिय रूप से नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित आवेदन जमा कराए हैं।

कितनी आपत्तियाँ आईं — किस पार्टी ने कितने नाम जोड़े-कटवाए

अब तक प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, कुल 373 आवेदन नाम जोड़ने के लिए आए हैं, जबकि 6 आवेदन नाम कटवाने से जुड़े हैं।

  • भारतीय जनता पार्टी ने 193 नाम जोड़ने के लिए आवेदन दिया

  • कांग्रेस ने 178 नाम जोड़ने के लिए आपत्तियाँ दर्ज कराईं

  • भाजपा की ओर से 4 नाम हटाने का आवेदन

  • कांग्रेस की ओर से 2 नाम हटाने का आवेदन

  • भारत आदिवासी पार्टी ने 2 नए नाम जोड़ने की आपत्ति दी

इन आँकड़ों से साफ है कि राजनीतिक दल मतदाता सूची में अपने समर्थकों के नाम सुनिश्चित करवाने के लिए गंभीरता से फॉलो-अप कर रहे हैं।

फॉर्म 6 और फॉर्म 7 के बड़े आँकड़े

निर्वाचन विभाग के अनुसार, 27 अक्टूबर से 16 दिसंबर के बीच मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 के 1,91,267 आवेदन प्राप्त हुए।
वहीं, नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 के 24,616 आवेदन विभाग तक पहुँचे।

इन सभी आवेदनों की जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

SIR के बाद 41.85 लाख वोट संदिग्ध श्रेणी में

SIR अभियान के दौरान करीब 41.85 लाख मतदाताओं के नाम “अनकलेक्टेड” श्रेणी में डाले गए हैं। यह वे मतदाता हैं जो सत्यापन के दौरान घर पर नहीं मिले, स्थायी रूप से अन्यत्र शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर जिनके नाम डुप्लीकेट पाए गए।
इन सभी मतदाताओं को निर्धारित अवधि में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी, अन्यथा नाम हटाए भी जा सकते हैं।

8 लाख से अधिक लोगों को जाएगा नोटिस

निर्वाचन विभाग अब 8,29,710 मतदाताओं को नोटिस भेजने की तैयारी में है। ये नाम “अनमैप्ड” श्रेणी में आते हैं — यानी इन व्यक्तियों या उनके माता-पिता के नामों का 2002 की सूची से मिलान नहीं हो पाया।
नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ अपना दावा प्रस्तुत करना होगा।

मतदाता सूची की शुद्धता पर फोकस

अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा अभ्यास मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटि-मुक्त बनाने के लिए किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले चुनावों से पहले मृत, डुप्लीकेट और स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नामों को सही तरीके से अपडेट किया जा सके।

आगे क्या होगा

आवेदन और आपत्तियाँ निपटाने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी की जाएगी। राजनीतिक दलों की निगाहें भी इसी प्रक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि मतदाता सूची का हर नाम आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading