राजस्थान में 4 मार्च को होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। रंगों के इस उत्सव में आमजन से लेकर जनप्रतिनिधि तक शामिल रहे। हालांकि त्योहार की रौनक के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां फिर से तेज होने जा रही हैं। होली के कारण 27 फरवरी से स्थगित किया गया राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार 5 मार्च से पुनः प्रारंभ होगा।
विधानसभा की बैठक सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के साथ शुरू होगी। इसके बाद सदन में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। राज्य की राजनीतिक दिशा और नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने वाले कई अहम विधेयक इस सत्र में पेश और पारित किए जाने की संभावना है।
दो से अधिक बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल
इस सत्र का सबसे चर्चित प्रस्ताव पंचायती संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव से जुड़ा है। अब तक दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। इस प्रावधान को समाप्त करने के लिए संशोधन बिल सदन में लाया जाएगा।
पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर पंचायतीराज संशोधन विधेयक को सदन में पेश करेंगे। वहीं नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा नगरपालिका संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इन संशोधनों के जरिए चुनावी पात्रता से संबंधित नियमों में बदलाव प्रस्तावित है, जिससे बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण और शहरी निकायों की राजनीति में व्यापक प्रभाव डाल सकता है। विपक्ष द्वारा इस विषय पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
अन्य अहम विधेयकों पर भी होगी चर्चा
गुरुवार को राजस्थान जन विश्वास उपबंधों के संशोधन विधेयक 2026 पर भी चर्चा निर्धारित है। इस विधेयक का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। चर्चा के बाद इसे पारित कराने की तैयारी है।
इसके अतिरिक्त राजस्थान दुकान एवं वाणिज्यिक संस्थान संशोधन विधेयक 2026 पर भी विचार-विमर्श होगा। यह विधेयक व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव से संबंधित है। राज्य में व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने और श्रम संबंधी प्रक्रियाओं को संतुलित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
6 मार्च तक तय कार्यक्रम, आगे बढ़ सकता है सत्र
सूत्रों के अनुसार विधानसभा का कामकाज फिलहाल 6 मार्च तक निर्धारित किया गया है। यदि कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिश पर सत्र आगे बढ़ाया जाता है तो पंचायतीराज और नगरपालिका संशोधन विधेयकों को 9 मार्च को पारित कराया जा सकता है।
राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बजट सत्र के दौरान लिए गए फैसले राज्य की प्रशासनिक और विकासात्मक दिशा तय करते हैं। होली के उत्सव के बाद अब प्रदेश की राजनीति फिर से सक्रिय हो गई है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ सदन में उतरने की तैयारी में हैं।


