बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री और हाल ही में किन्नर अखाड़ा से जुड़ी ममता कुलकर्णी ने महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा देने के करीब एक सप्ताह बाद अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दो वीडियो साझा किए, जिनमें उन्होंने जीवन, सत्य और स्वतंत्रता को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
ममता कुलकर्णी ने कहा कि सच को किसी वस्त्र की आवश्यकता नहीं होती और वह किसी धर्म या राजनीतिक पहचान से परे होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे नवंबर 2024 में भारत उसी रूप में लौटी थीं, जैसा वीडियो में दिख रहा है।
सत्य को किसी वस्त्र की जरूरत नहीं—ममता कुलकर्णी
2 फरवरी को साझा किए गए पहले वीडियो में ममता ने कहा कि सत्य को किसी प्रकार का आवरण नहीं चाहिए और न ही उसे किसी संस्था, धर्म या पार्टी से जोड़ने की जरूरत होती है। उन्होंने जय भवानी का उच्चारण करते हुए खुद को पूरी तरह स्वतंत्र बताया।
उन्होंने कहा कि उनके लिए जीवन में सत्य का महत्व किसी भी पद या संगठन से अधिक है। इसी विचार के चलते वे बाहरी पहचान या पदों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं।
दूसरे वीडियो में संगठन और पद को लेकर विचार
दूसरे वीडियो में ममता कुलकर्णी ने कहा कि किसी भी संघ की पहचान उसके आचरण और व्यवहार से होती है। उन्होंने बताया कि उन्हें कई स्थानों से महामंडलेश्वर पद के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए क्योंकि वे स्वतंत्र रूप से अपना मार्ग चुनना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि पद के साथ आने वाली सीमाएँ उन्हें स्वीकार नहीं, इसलिए वे पूरी तरह आजाद होकर अपने विश्वास के मार्ग पर आगे बढ़ने का निर्णय ले चुकी हैं।
किन्नर अखाड़ा से निष्कासन का विवाद
माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयान के बाद किन्नर अखाड़ा ने उन्हें संगठन से निष्कासित कर दिया था। संगठन के इस निर्णय के बाद ममता कुलकर्णी ने पद से त्यागपत्र दे दिया और स्पष्ट किया कि वे किसी दबाव में नहीं हैं, बल्कि अपने विचारों के चलते पद छोड़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि पद पर रहते हुए ही नहीं, बल्कि उसके बिना भी वे अपनी आस्था और विश्वास के मार्ग पर चलती रहेंगी।
त्यागपत्र में नाम को लेकर चर्चा
अपने त्यागपत्र में ममता कुलकर्णी ने अपना नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा और बीच में ‘मुकुंद’ जोड़ा। लेकिन अखाड़े की ओर से मिला नाम ‘यमाई ममता नंद गिरि’ शामिल नहीं किया।
इसे उनके समर्थक इस रूप में देख रहे हैं कि उन्होंने स्वयं को अखाड़े की पहचान से अलग करने का संकेत दिया और यह निर्णय उनकी स्वतंत्र इच्छा का परिणाम है।
एक साल में कई बार सामने आया विवाद
गौरतलब है कि ममता कुलकर्णी जनवरी पिछले साल किन्नर अखाड़े से जुड़ी थीं, लेकिन बीते एक वर्ष में कई मौकों पर उनके और संगठन के बीच मतभेद उभर कर सामने आते रहे।
अब उनके इस्तीफे और वीडियो के बाद यह स्पष्ट है कि ममता संगठनात्मक भूमिकाओं से अलग होकर अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं।


