अडाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 514 करोड़ रुपए पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 383 करोड़ रुपए था। ताजा नतीजों से यह स्पष्ट हुआ है कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है और विस्तार रणनीति का असर अब वित्तीय प्रदर्शन में दिखाई दे रहा है।
तिमाही आधार पर देखें तो कंपनी के मुनाफे में बेहद तेज उछाल आया है। दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ केवल 5 करोड़ रुपए था, जबकि मार्च तिमाही में यह बढ़कर 514 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी एक तिमाही में कंपनी के मुनाफे में 100 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह तेजी निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है।
कंपनी की आय में भी अच्छा सुधार देखने को मिला। चौथी तिमाही में अडाणी ग्रीन का राजस्व सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 3,094 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 2,666 करोड़ रुपए था। वहीं तिमाही आधार पर राजस्व में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, क्योंकि दिसंबर तिमाही में कंपनी की आय 2,420 करोड़ रुपए थी। बढ़ती ऑपरेशनल क्षमता और नए प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से कंपनी की कमाई में मजबूती आई है।
कंपनी ने अपने बेहतर प्रदर्शन के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। अडाणी ग्रीन ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसने 5.1 गीगावॉट की रिकॉर्ड ग्रीनफील्ड क्षमता जोड़ी है। किसी भी कंपनी के लिए इतनी बड़ी नई क्षमता एक वर्ष में जोड़ना उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है। इसके साथ ही एडवांस रिन्यूएबल टेक्नोलॉजी के उपयोग और मौजूदा प्लांट्स के मजबूत प्रदर्शन ने भी नतीजों को बेहतर बनाया है।
कंपनी ने गुजरात के खावड़ा और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत को भी प्रमुख कारण बताया है। राजस्थान पहले से ही सौर ऊर्जा के लिए अनुकूल राज्य माना जाता है, जबकि गुजरात का खावड़ा क्षेत्र बड़े स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए तेजी से उभर रहा है। इन इलाकों में निवेश बढ़ने से कंपनी की उत्पादन क्षमता और भविष्य की आय दोनों में बढ़त की उम्मीद है।
अडाणी ग्रीन के कामकाजी मुनाफे यानी EBITDA में भी मजबूत सुधार दर्ज हुआ है। कंपनी का EBITDA करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 2,882 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,402 करोड़ रुपए था। EBITDA किसी कंपनी के मूल व्यवसाय से होने वाली कमाई को दर्शाता है और इससे यह समझा जाता है कि कंपनी का परिचालन कितना मजबूत है।
मार्जिन में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 78.2 प्रतिशत से बढ़कर 82.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि कंपनी लागत नियंत्रण और उत्पादन क्षमता के मामले में अधिक कुशल हुई है। उच्च मार्जिन आमतौर पर बेहतर प्रबंधन और मजबूत बिजनेस मॉडल का संकेत माना जाता है।
यदि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का कुल शुद्ध लाभ 1,987 करोड़ रुपए रहा। यह पिछले वर्ष के 2,001 करोड़ रुपए की तुलना में मामूली गिरावट है। हालांकि पूरे साल के दौरान कंपनी की आय में 22 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई और यह 11,602 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यानी कंपनी का राजस्व तेजी से बढ़ा है, जबकि लाभ लगभग स्थिर रहा है।
कंपनी ने अपनी बैटरी स्टोरेज क्षमता को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में अडाणी ग्रीन की बैटरी स्टोरेज क्षमता 1,376 मेगावॉट आवर तक पहुंच गई है। कंपनी के अनुसार यह दुनिया में किसी एक स्थान पर सबसे बड़े परिचालनों में से एक है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2027 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 10,000 मेगावॉट आवर तक ले जाना है। यह लक्ष्य भारत के ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।
अडाणी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडाणी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 कंपनी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण वर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही साल में 5.1 गीगावॉट ग्रीनफील्ड क्षमता जोड़कर कंपनी की कुल परिचालन क्षमता 19.3 गीगावॉट तक पहुंच गई है। उनके अनुसार चीन के बाहर किसी भी कंपनी द्वारा एक साल में किया गया यह सबसे बड़ा विस्तार है।
नतीजों का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। परिणाम जारी होने के बाद अडाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,227 रुपए पर बंद हुआ। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में करीब 21 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी पर मजबूत बना हुआ है।
अडाणी ग्रीन एनर्जी भारत की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी की स्थापना जनवरी 2015 में अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी के रूप में हुई थी। आज कंपनी की मौजूदगी देश के 12 राज्यों में है और यह सौर तथा पवन ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बढ़ती बिजली मांग, स्वच्छ ऊर्जा पर सरकारी फोकस और कार्बन उत्सर्जन कम करने की नीति के चलते अडाणी ग्रीन जैसी कंपनियों के लिए आने वाले वर्षों में बड़े अवसर मौजूद हैं। यदि कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं को समय पर पूरा करती है, तो भविष्य में इसके वित्तीय प्रदर्शन में और मजबूती देखने को मिल सकती है।


