राजस्थान के नागौर जिले में 10 टन अवैध विस्फोटक बरामद होने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के फार्महाउस पर बुलडोजर चलाया। डेगाना तहसील के हरसौर गांव में शुक्रवार को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी सुलेमान देशवाली के अवैध अड्डे को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटाते हुए करीब 25 बीघा गोचर भूमि को मुक्त कराया गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान फार्महाउस परिसर में बने कई अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीनों की मदद से तोड़ा गया और मौके पर बने मकान को भी सीज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
सरकारी गोचर भूमि पर किया गया था अवैध कब्जा
जांच में सामने आया कि आरोपी सुलेमान देशवाली ने करीब 45 बीघा जमीन में अपना फार्महाउस तैयार कर रखा था। इसमें से लगभग 25 बीघा जमीन सरकारी गोचर भूमि की थी, जिस पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कर लिया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि फार्महाउस परिसर में चारदीवारी, मेडबंदी, तारबंदी, डेम, पुराना कुआं और कई पिलर बनाए गए थे, जिन्हें अवैध मानते हुए ध्वस्त कर दिया गया।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार सतीश कुमार राव के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद रही। इसके साथ ही थांवला, डेगाना और पादूकलां थानों का पुलिस जाब्ता भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात रहा, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
24 जनवरी को बरामद हुआ था 10 टन विस्फोटक
गौरतलब है कि इसी वर्ष 24 जनवरी को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सुलेमान देशवाली के कब्जे से करीब 10 टन अवैध विस्फोटक बरामद किया था। यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद गंभीर मामला मानी गई थी। इसके बाद पुलिस ने सुलेमान सहित चार सप्लायर्स को गिरफ्तार कर लिया था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विभिन्न मैगजीन होल्डर्स से अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री खरीदता था और उसे अलग-अलग जगहों पर सप्लाई करता था। इस पूरे नेटवर्क में देवराज मेड़तिया नामक व्यक्ति की भी संलिप्तता सामने आई है।
एनआईए कर रही है मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी को सौंप दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री किस उद्देश्य से जमा की गई थी और इसके पीछे किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था।
तहसीलदार सतीश कुमार राव ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है और अब यह भूमि राजस्व विभाग के कब्जे में ले ली गई है। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।


