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एडीए के छह अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप, ACB की जांच

एडीए के छह अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप, ACB की जांच

शोभना शर्मा, अजमेर। अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) के कुछ अधिकारियों पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई की गई है। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) (ACB)ने प्राधिकरण की तत्कालीन उपायुक्त और वर्तमान में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त दीप्ति शर्मा ( Additional Divisional Commissioner Deepti Sharma) सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने आपस में मिलीभगत करके व्यवसायिक भूमि का शुल्क आवासीय दरों पर वसूलकर राजस्व में लगभग 2 लाख 10 हजार रुपये की हानि पहुंचाई।

परिवादी की शिकायत और एसीबी की जांच

यह मामला तब सामने आया जब परिवादी ने 3 मई 2017 को एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एडीए के अधिकारियों ने लाभार्थी देवेन्द्र कुमार सिंघल और सरला देवी सिंघल के ग्राम थोक तेलियान स्थित खसरा नंबर 118 के 221.67 वर्ग गज भूमि को व्यवसायिक उपयोग के बावजूद आवासीय शुल्क वसूल कर नकली शपथ पत्र और तस्वीरों के माध्यम से गलत रिपोर्ट तैयार की।

एसीबी के निरीक्षक दीनदयाल द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन उपायुक्त दीप्ति शर्मा, सहायक नगर नियोजक नवनीत कुमार शर्मा, और संविदाकर्मी गुरजीत सिंह ने मिलकर भूमि का नकली स्थल मानचित्र जारी किया। उन्होंने सरकारी परिपत्र 18 सितम्बर 2003 का उल्लंघन करते हुए आनासागर सरक्यूलर रोड की निर्धारित दूरी में कमी करके गलत तरीके से साइट प्लान को मंजूरी दी।

राज्य सरकार के परिपत्र का उल्लंघन

एडीए के इन अधिकारियों ने राज्य सरकार के परिपत्र का उल्लंघन कर लाभार्थियों को फायदा पहुंचाया। नियम के अनुसार, आनासागर रोड से 60-60 फीट की दूरी छोड़कर व्यवसायिक साइट प्लान तैयार करना था, लेकिन उन्होंने इसे घटाकर 50-50 फीट कर दिया। एडीए के कनिष्ठ सहायक करण सिंह ने भी इस भूमि की लीज-डीड को पूर्व-मान्यता देते हुए गलत टिप्पणी दर्ज की और इसे दोबारा वैध करार दिया।

आरोपियों द्वारा आपसी मिलीभगत और शपथ पत्र का दुरुपयोग

आरोपियों ने राजस्व हानि पहुंचाने के लिए विभिन्न दस्तावेजों में गड़बड़ियां कीं। उन्होंने झूठा शपथ-पत्र और फोटो का उपयोग करते हुए भूमि को आवासीय घोषित किया और लाभार्थी से सिर्फ आवासीय शुल्क (1,87,382 रुपये) लिया, जबकि मास्टर प्लान और मौका रिपोर्ट के अनुसार यह भूमि व्यवसायिक थी। व्यवसायिक दर के अनुसार यहां 3,97,817 रुपये की राशि वसूली जानी चाहिए थी, जिससे लगभग 2,10,435 रुपये की राजस्व हानि प्रमाणित हुई है।

आरोपियों के नाम और पहचान

एसीबी ने इस मामले में जिन छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनके नाम और पहचान निम्नलिखित हैं:

  1. दीप्ति शर्मा (41): तत्कालीन उपायुक्त, वर्तमान अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, अजमेर
  2. नवनीत कुमार शर्मा (65): तत्कालीन सहायक नगर नियोजक, वर्तमान में सेवानिवृत्त
  3. गुरजीत सिंह (57): कनिष्ठ प्रारूपकार, संविदाकर्मी, अजमेर विकास प्राधिकरण
  4. करण सिंह (29): कनिष्ठ सहायक, अजमेर विकास प्राधिकरण
  5. देवेन्द्र कुमार सिंघल (57): लाभार्थी
  6. सरला देवी (77): लाभार्थी

आर्थिक हानि और घोटाले की गहराई

इस मामले में एसीबी की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर आपसी मिलीभगत से राजस्व हानि पहुंचाई। व्यवसायिक भूमि के लिए आवासीय शुल्क लेकर सरकार को लाखों का नुकसान पहुंचाया गया। यह घोटाला न केवल सरकारी आदेशों की अनदेखी को दर्शाता है, बल्कि इसमें सरकारी सिस्टम में हो रही घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का भी पर्दाफाश होता है।

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