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शेयर बाजार में 10 सितंबर को दिख सकता है बड़ा मूवमेंट

शेयर बाजार में 10 सितंबर को दिख सकता है बड़ा मूवमेंट

मनीषा शर्मा।  नया हफ्ता शेयर बाजार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। वेल्थव्यू एनालिटिक्स के डायरेक्टर हर्षुभ शाह ने अपनी वीकली रिपोर्ट में कहा है कि बाजार में 10 सितंबर (±1 दिन) को बड़ा मूवमेंट देखने को मिल सकता है। इस दिन ट्रेडिंग सेशन के दौरान निफ्टी और सेंसेक्स में हाई-मोमेंटम स्विंग्स हो सकते हैं। ट्रेडर्स को सुबह 10:20 AM, 11:20 AM और 12:25 PM के आसपास खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये समय स्विंग हाई, स्विंग लो और रिवर्सल के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स

सपोर्ट जोन (Support Zone):
24,676 | 24,540 | 24,480 | 24,445 | 24,382 | 24,331 | 24,140

सपोर्ट वह स्तर होता है जहां शेयर या इंडेक्स को गिरने से सहारा मिलता है। इन लेवल्स पर खरीदार सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इंडेक्स और नीचे नहीं गिरता। यह निवेशकों के लिए खरीदारी का अवसर हो सकता है।

रेजिस्टेंस जोन (Resistance Zone):
24,806 | 24,856 | 24,987 | 25,083 | 25,145 | 25,322 | 25,435

रेजिस्टेंस वह स्तर होता है जहां बाजार ऊपर जाने से रुक जाता है। यह स्थिति आमतौर पर बिकवाली बढ़ने से आती है। अगर निफ्टी इन लेवल्स को पार करता है तो नया तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है।

ट्रेडिंग टिप्स: क्या करें ट्रेडर्स?

  1. 10 सितंबर का महत्व: इस दिन बाजार में बड़े मूवमेंट की संभावना है। डे-ट्रेडर्स को समय-समय पर ट्रेंड रिवर्सल के लिए अलर्ट रहना होगा।

  2. सपोर्ट और रेजिस्टेंस का ध्यान: निफ्टी अगर सपोर्ट लेवल्स के नीचे जाता है तो शॉर्ट पोजीशन बन सकती है। वहीं, अगर रेजिस्टेंस पार करता है तो लॉन्ग पोजीशन लेने का अवसर होगा।

  3. टाइम क्लस्टर का इस्तेमाल: डे-ट्रेडिंग में बताए गए टाइम क्लस्टर से संकेत लेकर तेजी या गिरावट की सही एंट्री की जा सकती है।

  4. रिस्क मैनेजमेंट: बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना जरूरी है।

इस हफ्ते बाजार को प्रभावित करने वाले 5 बड़े फैक्टर्स

1. महंगाई दर के आंकड़े

12 सितंबर को अगस्त महीने की रिटेल महंगाई दर (CPI inflation) के आंकड़े जारी होंगे। जुलाई में यह दर घटकर 1.55% पर आ गई थी, जो पिछले 8 साल 1 महीने का निचला स्तर था। निवेशक महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे, क्योंकि यह RBI की पॉलिसी और बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

2. FII और DII की गतिविधियां

शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,305 करोड़ रुपए की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 1,821 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

  • इस साल अब तक FIIs कुल 2.15 लाख करोड़ रुपए के नेट सेलर रहे हैं।

  • वहीं, DIIs ने 5.24 लाख करोड़ रुपए की नेट खरीदारी की है।

यह ट्रेंड बताता है कि भारतीय बाजार पर अब DII का भरोसा बढ़ा है, जबकि विदेशी निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

3. अमेरिकी बाजार की चाल

भारतीय शेयर बाजार अक्सर अमेरिकी बाजार से संकेत लेते हैं। शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट में गिरावट दर्ज हुई:

  • डाउ जोंस 220 अंक या 0.48% गिरकर 45,400 पर बंद हुआ।

  • S&P 500 20 अंक या 0.32% गिरकर 6,481 पर रहा।

  • नैस्डैक कम्पोजिट 7 अंक या 0.034% गिरकर 21,700 पर बंद हुआ।

यह गिरावट भारतीय बाजार में भी शुरुआती दबाव ला सकती है।

4. अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उन देशों को टैरिफ छूट दी गई है जिन्होंने इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट एग्रीमेंट कर लिए हैं। इसमें निकेल, सोना, फार्मास्यूटिकल कंपाउंड और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। इस फैसले से ग्लोबल कमोडिटी मार्केट और मेटल्स सेक्टर पर असर पड़ सकता है।

5. टेक्निकल फैक्टर्स

  • SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी के लिए रेजिस्टेंस 24,950–25,000 के बीच है, जबकि सपोर्ट 24,550–24,500 के दायरे में है।

  • रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के अजित मिश्रा ने कहा कि अगर निफ्टी 25,000 के ऊपर ब्रेकआउट करता है तो यह इंडेक्स को 25,250 और फिर 25,400 की ओर ले जा सकता है।

पिछले हफ्ते बाजार का प्रदर्शन

1 से 5 सितंबर के हफ्ते में निफ्टी 1.29% की तेजी के साथ 24,741 पर बंद हुआ।

  • सेंसेक्स 1.13% बढ़कर 80,710 पर बंद हुआ।

  • मिडकैप इंडेक्स में 1.8% की बढ़त हुई।

  • स्मॉलकैप इंडेक्स 2.5% चढ़ा।

इस तेजी के पीछे दो बड़े कारण रहे:

  1. पहली तिमाही की 7.8% GDP ग्रोथ

  2. GST स्लैब को 4 से घटाकर 2 करने का फैसला

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