राजस्थान के कृषि प्रधान क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। ऐसे में लंबे समय से अधूरी पड़ी गरड़दा सिंचाई परियोजना को लेकर सामने आई नई प्रगति हजारों किसानों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आई है। लगभग 23 वर्षों से विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से अटकी यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। परियोजना के शेष कार्यों को पूरा करने की दिशा में सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं और अब 4 जून को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 75 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 29 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण कार्य का शिलान्यास करेंगे।
यह परियोजना केवल एक नहर निर्माण योजना नहीं है, बल्कि क्षेत्र के कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक व्यापक विकास अभियान है। वर्षों से किसान इस परियोजना के पूर्ण होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि इसके पूरा होने से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को नियमित सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को वर्षा पर निर्भरता से काफी हद तक राहत मिलेगी।
गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना की परिकल्पना क्षेत्र में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि क्षेत्र को स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत बांध के दाएं और बाएं दोनों किनारों पर कुल 103 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित की जानी थी। परियोजना के प्रारंभिक चरण में लगभग 73 किलोमीटर नहर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था, लेकिन शेष 29 किलोमीटर का हिस्सा वन क्षेत्र में आने के कारण लंबे समय तक अधूरा पड़ा रहा।
वन भूमि से जुड़े नियमों और अनुमतियों के कारण यह परियोजना वर्षों तक फाइलों में अटकी रही। नहर निर्माण के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक था, लेकिन यह प्रक्रिया लंबे समय तक पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप परियोजना का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा निर्माणाधीन ही रह गया। इस कारण पहले से निर्मित नहर नेटवर्क का भी अपेक्षित लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाया।
फरवरी माह में वन विभाग द्वारा आवश्यक एनओसी जारी किए जाने के बाद परियोजना को नई गति मिली। इसके बाद संबंधित विभागों ने तेजी से प्रक्रिया पूरी करते हुए निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए और अब निर्माण एजेंसी का चयन भी पूरा हो चुका है। इससे परियोजना के शेष हिस्से पर काम शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस परियोजना की एक और विशेषता यह है कि केवल नई नहर का निर्माण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि पहले से बनी नहरों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य भी साथ-साथ किया जाएगा। पिछले दो दशकों में कई स्थानों पर नहरों का ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया था। कहीं दीवारें टूट गईं तो कहीं जल प्रवाह की क्षमता प्रभावित हुई। ऐसे में नई स्वीकृति के तहत इन सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों को पुनः विकसित किया जाएगा ताकि पूरी नहर प्रणाली सुचारु और प्रभावी तरीके से संचालित हो सके।
जल संसाधन विभाग के अनुसार परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्र की 9,161 हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रत्यक्ष रूप से सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। इससे 44 गांवों के हजारों किसान लाभान्वित होंगे। वर्तमान में कई किसान सीमित जल संसाधनों के कारण केवल एक फसल ही ले पाते हैं या वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहते हैं। नहर के माध्यम से नियमित पानी मिलने के बाद खेती के स्वरूप में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। किसान अधिक उत्पादन वाली फसलों की खेती कर सकेंगे और बहुफसली कृषि प्रणाली को भी अपनाने में सक्षम होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंचाई सुविधाओं में सुधार का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है। पर्याप्त पानी मिलने से फसल उत्पादन बढ़ता है, सिंचाई पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होता है और कृषि जोखिम भी घटता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होती है। गरड़दा परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस परियोजना का महत्व केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गरड़दा बांध से जुड़े जल संसाधनों का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भी किया जाएगा। क्षेत्र के कई गांवों और ढाणियों में लंबे समय से पेयजल की समस्या बनी हुई है। इस चुनौती को देखते हुए परियोजना के तहत 111 गांवों और 98 ढाणियों तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
पेयजल आपूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे का निर्माण भी परियोजना के साथ-साथ किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जब यह योजना पूरी तरह क्रियान्वित हो जाएगी, तब क्षेत्र के लोगों को पेयजल के लिए लंबी दूरी तय करने या वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर गरड़दा सिंचाई परियोजना का पुनर्जीवन क्षेत्र के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। करीब 23 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद परियोजना का शेष कार्य शुरू होने जा रहा है, जिससे कृषि, पेयजल और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना न केवल हजारों किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


