राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। राज्य की तीन रिक्त हो रही राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की दो सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इन सीटों पर पार्टी किसे उम्मीदवार बनाएगी, इसे लेकर लंबे समय से सस्पेंस बना हुआ था। इसी बीच पूर्व भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी सुनीता बैंसला का नाम अचानक राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार केवल पारंपरिक राजनीतिक चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे व्यक्तित्व को अवसर दे सकती है, जिसकी प्रशासनिक क्षमता, सामाजिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक दृष्टि मजबूत हो। सुनीता बैंसला का नाम इसी कारण प्रमुखता से सामने आ रहा है। उनकी पहचान केवल एक पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े एक सक्रिय चेहरे के रूप में भी बन चुकी है।
सुनीता बैंसला का प्रशासनिक जीवन काफी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय राजस्व सेवा में प्रवेश किया और लंबे समय तक आयकर विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक पदों पर कार्य करते हुए प्रभावी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। जयपुर में प्रिंसिपल कमिश्नर और बाद में आयकर विभाग में उच्च स्तर की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के कारण उन्हें एक अनुभवी और सक्षम अधिकारी के रूप में देखा जाता है। हाल ही में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे सार्वजनिक और सामाजिक गतिविधियों में लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।
सुनीता बैंसला का नाम चर्चा में आने का एक बड़ा कारण उनके पिता और गुर्जर समाज के प्रमुख नेता रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की विरासत भी है। कर्नल बैंसला ने राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करते हुए समाज के भीतर एक मजबूत पहचान बनाई थी। वर्ष 2022 में उनके निधन के बाद सुनीता बैंसला ने उनके सामाजिक विचारों और जनहित से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली। वे लगातार समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार से जुड़े मुद्दों पर संवाद कर रही हैं।
अपने पिता के विचारों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के लिए उन्होंने उनके जीवन, संघर्ष और सिद्धांतों पर आधारित एक पुस्तक भी लिखी है। इस पुस्तक के माध्यम से उन्होंने कर्नल बैंसला के सामाजिक संदेशों और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। इसके अलावा सैन्य जीवन और राष्ट्रसेवा से जुड़े विषयों पर भी उनका योगदान रहा है, जिससे उनकी राष्ट्रवादी सोच और अनुशासित कार्यशैली को बल मिलता है।
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर एमबीसी और गुर्जर बहुल इलाकों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ी है। वे समाज में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर अभियान चला रही हैं। उनका विशेष ध्यान ग्रामीण युवाओं और छात्राओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने पर रहा है। इसके साथ ही वे सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च को कम करने और आर्थिक रूप से मजबूत समाज के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा सुनीता बैंसला को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाती है तो इससे पार्टी को कई स्तरों पर राजनीतिक लाभ मिल सकता है। राजस्थान में गुर्जर समाज और एमबीसी वर्ग का महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इस वर्ग से आने वाली एक शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाली महिला को राज्यसभा भेजना पार्टी के लिए एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश साबित हो सकता है।
इसके अलावा भाजपा लंबे समय से महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पेशेवर लोगों को राजनीति में अवसर देने की रणनीति पर काम कर रही है। सुनीता बैंसला का नाम इस दृष्टिकोण के अनुरूप भी माना जा रहा है। एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी होने के कारण उनकी छवि स्वच्छ, अनुभवी और प्रशासनिक समझ रखने वाले चेहरे की है, जो संसद के उच्च सदन में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के महीनों में उनकी राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने उनकी संभावित दावेदारी को और मजबूत किया है। वहीं उनका परिवार भी लंबे समय से राष्ट्रसेवा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनके भाई विजय बैंसला भाजपा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भारतीय सेना में उच्च पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। इस पृष्ठभूमि को भी उनकी दावेदारी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक भाजपा नेतृत्व की ओर से किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सुनीता बैंसला का नाम जिस तेजी से राजनीतिक चर्चाओं में उभरा है, उसने राज्यसभा चुनाव को और अधिक रोचक बना दिया है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामांकन के साथ तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। फिलहाल राजस्थान की राजनीति में यह सवाल सबसे अधिक चर्चा में है कि क्या भाजपा सामाजिक, प्रशासनिक और महिला नेतृत्व के संतुलन को ध्यान में रखते हुए सुनीता बैंसला पर दांव खेलेगी या फिर किसी अन्य चेहरे को मौका देगी। राज्यसभा चुनाव की इस राजनीतिक हलचल के बीच सुनीता बैंसला का नाम निश्चित रूप से सबसे प्रमुख संभावित दावेदारों में शामिल हो चुका है।


