अजमेर में अवैध हुक्का बार के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मौके पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने ही कथित रूप से कार्रवाई का विरोध करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला केवल अवैध हुक्का बार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस विभाग के एक अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अजमेर पुलिस अधीक्षक ने संबंधित ASI को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हुक्का बार का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
जानकारी के अनुसार, गंज थाना क्षेत्र में स्थित एक कैफे में लंबे समय से अवैध रूप से हुक्का परोसे जाने की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस को सूचना मिली थी कि बोराज रोड स्थित धानुका गार्डन के पास संचालित सीएनसी कैफे में बिना अनुमति और बिना लाइसेंस के ग्राहकों को विभिन्न फ्लेवर के हुक्के उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गंज थाना पुलिस और दरगाह सर्किल की टीम ने सोमवार देर रात संयुक्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
रात करीब साढ़े ग्यारह बजे पुलिस टीम ने कैफे पर दबिश दी। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई। जांच के दौरान कई युवक हुक्का पीते हुए पाए गए। पुलिस ने मौके की तलाशी लेकर चार हुक्के, चार चिलम और हुक्का संचालन में उपयोग होने वाली अन्य सामग्री जब्त की। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा था और इसके लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कैफे में मौजूद 19 वर्षीय युवक जतिन से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह ग्राहकों को अलग-अलग फ्लेवर के हुक्के उपलब्ध करा रहा था। पुलिस ने उसके खिलाफ राजस्थान धूम्रपान निषेध एवं गैर-धूम्रपानकर्ताओं के स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच में यह भी देखा जाएगा कि कैफे संचालन में उसकी भूमिका कितनी थी और उसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
इस कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब पुलिस लाइन में तैनात सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) अनिल जाखड़ मौके पर मौजूद मिले। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान उन्होंने कथित रूप से विरोध करना शुरू कर दिया और स्वयं को कैफे का मालिक बताया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब टीम अपना काम कर रही थी, तब एएसआई ने हंगामा करना शुरू कर दिया और कार्रवाई में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें शांत रहने और जांच में सहयोग करने की सलाह दी, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि एएसआई का व्यवहार लगातार आक्रामक बना रहा, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें शांति भंग करने और पुलिस कार्य में व्यवधान डालने के आरोप में हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल पैदा कर दी क्योंकि एक ओर पुलिस अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी और दूसरी ओर विभाग का ही एक अधिकारी विवादों में घिर गया।
मामले की जानकारी मिलते ही अजमेर पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की। प्रारंभिक तथ्यों और पुलिस कार्रवाई के दौरान सामने आए व्यवहार को देखते हुए उन्होंने एएसआई अनिल जाखड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। पुलिस विभाग अब उनके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकता है।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संबंधित एएसआई पहले भी एक प्रॉपर्टी विवाद के मामले में निलंबन का सामना कर चुके हैं। ऐसे में उनके खिलाफ यह नया मामला और अधिक गंभीर माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कैफे और हुक्का बार के संचालन में उनके परिवार के किसी सदस्य की भूमिका तो नहीं थी। प्रारंभिक स्तर पर यह जानकारी सामने आई है कि एएसआई के बेटे का नाम भी इस मामले से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है और जांच जारी है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने केवल संचालकों के खिलाफ ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि हुक्का पीते पाए गए युवकों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए। मौके पर मौजूद 10 युवकों के खिलाफ कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई और प्रत्येक पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार पुलिस ने कुल दो हजार रुपये की चालान राशि वसूल की। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी ताकि युवाओं को ऐसे अवैध और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गतिविधियों से दूर रखा जा सके।
मंगलवार को जब एएसआई अनिल जाखड़ को अदालत में पेश करने के लिए ले जाया जा रहा था, तब भी उनका व्यवहार चर्चा का विषय बना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान विवादास्पद टिप्पणियां कीं और अपनी तस्वीरें खींचने को लेकर भी अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य पुलिस कार्रवाई के दौरान अपेक्षित आचरण से अलग दिखाई दिया, जिसकी चर्चा पूरे दिन होती रही।
फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि अवैध हुक्का बार का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस पूरे मामले में प्रभाव और पद का दुरुपयोग तो नहीं किया गया। अजमेर पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान में किसी भी व्यक्ति को उसकी पहचान या पद के आधार पर छूट नहीं दी जाएगी।


