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जैविक खेती करने वाले किसानों को मिलेगा 1 लाख रुपये का पुरस्कार

जैविक खेती करने वाले किसानों को मिलेगा 1 लाख रुपये का पुरस्कार

देशभर में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के बीच जैविक खेती का महत्व लगातार बढ़ रहा है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से जहां मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई है, वहीं मानव स्वास्थ्य पर भी इसके दुष्प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे समय में राज्य सरकार ने प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विशेष पुरस्कार योजना के तहत उन किसानों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है, जो पूरी तरह जैविक खेती अपनाकर गुणवत्तापूर्ण और रसायन मुक्त कृषि उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं।

कृषि विभाग के अनुसार इस योजना का उद्देश्य केवल किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन देना नहीं है, बल्कि राज्य में जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक किसानों को इस दिशा में प्रेरित करना भी है। वर्तमान समय में बाजार में जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। उपभोक्ता अब ऐसे खाद्यान्न, फल और सब्जियां खरीदना पसंद कर रहे हैं जिनमें रासायनिक अवशेष न हों और जो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार किसानों को जैविक उत्पादन की ओर आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करा रही है।

इस योजना के तहत राज्य स्तर पर चयनित प्रत्येक प्रगतिशील किसान को एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान उन किसानों को दिया जाएगा जिन्होंने जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और अपने प्रयासों से अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। हालांकि कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों को पूर्व में इस योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है, वे इस वर्ष आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नए और योग्य किसानों को अवसर प्रदान करना है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक खेती केवल रासायनिक खादों और कीटनाशकों का उपयोग बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र कृषि प्रणाली है जिसमें मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता दी जाती है। इसी कारण चयन प्रक्रिया में उन किसानों को विशेष महत्व दिया जाएगा जो खेती के साथ-साथ उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का कार्य भी कर रहे हैं। अर्थात यदि कोई किसान जैविक उत्पाद तैयार करने के बाद उसकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की व्यवस्था स्वयं करता है तो उसे चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना रहेगी।

सरकार का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य भी प्राप्त होना चाहिए। मूल्य संवर्धन और आधुनिक विपणन तकनीकों को अपनाने वाले किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि जैविक उत्पादों की पहचान और मांग को भी मजबूत कर सकते हैं। इसलिए इस प्रकार के नवाचारों को योजना में विशेष महत्व दिया गया है।

इसके अलावा उन किसानों को भी प्राथमिकता दी जाएगी जो अपने खेतों में वर्मी कंपोस्ट यूनिट या कंपोस्ट पिट का निर्माण कर स्वयं जैविक उर्वरक और जैविक कीटनाशक तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और बाहरी संसाधनों पर निर्भरता भी घटती है। साथ ही यह मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि विभाग का मानना है कि आत्मनिर्भर जैविक खेती मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

फसल चक्र और हरी खाद का उपयोग करने वाले किसानों को भी चयन में विशेष महत्व दिया जाएगा। फसल चक्र अपनाने से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है और रोगों तथा कीटों का प्रभाव कम होता है। वहीं हरी खाद मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करती है। यह पद्धति लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

योजना के लिए आवेदन करने वाले किसान का कृषि या बागवानी गतिविधियों से कम से कम पांच वर्षों से जुड़ा होना आवश्यक है। इसके साथ ही किसान को किसी मान्यता प्राप्त सरकारी अथवा निजी जैविक प्रमाणीकरण संस्था से पंजीकृत होना भी जरूरी होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो किसान पिछले दो वर्षों से लगातार अपनी खेती का जैविक प्रमाणीकरण करवा रहे हैं, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पुरस्कार वास्तव में उन किसानों को मिले जो लंबे समय से जैविक खेती के सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जैविक प्रमाणीकरण किसानों को बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके उत्पादों की विश्वसनीयता भी बढ़ाता है। प्रमाणित जैविक उत्पादों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।

सरकार ने पात्र किसानों से समय पर आवेदन करने की अपील की है। इस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 10 जून 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक किसान निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। योजना से संबंधित नियम, पात्रता, आवेदन पत्र अथवा अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान अलवर स्थित संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय, जिला परिषद में संपर्क कर सकते हैं।

राज्य सरकार की यह पहल न केवल किसानों को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करेगी, बल्कि प्रदेश में जैविक खेती के विस्तार को भी नई गति देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक किसान इस दिशा में आगे आते हैं तो इससे पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह योजना राजस्थान में टिकाऊ और प्राकृतिक कृषि प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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