latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

मदन राठौड़ का आरएलपी पर हमला, बोले- मेरी हत्या की थी मंशा

मदन राठौड़ का आरएलपी पर हमला, बोले- मेरी हत्या की थी मंशा

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध जताना नहीं था, बल्कि उनकी हत्या करने की मंशा दिखाई दे रही थी। उन्होंने दावा किया कि जिस प्रकार उनकी गाड़ी पर डंडों से हमला किया गया, उससे स्पष्ट हो गया था कि प्रदर्शनकारियों का इरादा केवल ज्ञापन सौंपने या विरोध दर्ज कराने का नहीं था।

रविवार को जयपुर स्थित प्रदेश बीजेपी कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मदन राठौड़ ने पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे और इसी दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोककर विरोध प्रदर्शन किया। राठौड़ ने सवाल उठाते हुए कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनका विरोध किस मुद्दे को लेकर किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा और सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए।

मदन राठौड़ ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी वास्तव में कोई मांग या शिकायत रखना चाहते थे तो वह शांतिपूर्वक ज्ञापन सौंप सकते थे। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आता तो वह स्वयं वाहन से उतरकर उनकी बात सुनने और ज्ञापन लेने के लिए तैयार थे। लेकिन घटनास्थल पर जो स्थिति बनी, उसने उन्हें हैरान कर दिया। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों ने उनकी कार पर डंडों से प्रहार करना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता हुई। राठौड़ ने कहा कि इसी कारण उन्होंने वाहन से बाहर निकलना उचित नहीं समझा, क्योंकि उन्हें लगा कि स्थिति कभी भी हिंसक रूप ले सकती है।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने इस पूरे मामले को राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति को गलत दिशा में ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की भाषा और व्यवहार मर्यादित नहीं है, वे राजनीति के लिए कलंक के समान हैं। राठौड़ ने दोहराया कि राजनीति के शुद्धिकरण की आवश्यकता है और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को अपने आचरण और शब्दों के चयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसा वातावरण नहीं बनना चाहिए जिसमें एक-दूसरे के प्रति सम्मान समाप्त हो जाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए मजबूत विपक्ष जरूरी होता है। यदि विपक्ष नहीं होगा तो सरकार को अपनी कमियों का पता नहीं चलेगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की भूमिका जिम्मेदारी और गरिमा के साथ निभाई जानी चाहिए। उनके अनुसार राजनीतिक विरोध ऐसा होना चाहिए जिसमें असहमति तो दिखाई दे, लेकिन व्यक्तिगत कटुता या हिंसा के लिए कोई स्थान न हो।

राठौड़ ने राजनीतिक भाषा की मर्यादा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेताओं को ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जिनके कारण बाद में एक-दूसरे के सामने आने पर शर्मिंदगी महसूस हो। उनका मानना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद व्यक्तिगत संबंध और सामाजिक सम्मान बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, व्यक्तियों की नहीं।

इस दौरान उन्होंने कुछ राजनीतिक बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले संदेश कभी स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता लोगों को कानून तोड़ने या सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने की सलाह देता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। राठौड़ के अनुसार जनप्रतिनिधियों का दायित्व समाज को सकारात्मक दिशा देना और कानून के प्रति सम्मान पैदा करना है।

सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित पुष्कर दौरे और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर भी मदन राठौड़ ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अन्य राजनीतिक दलों को प्रेरणा मिलती है तो यह स्वागतयोग्य बात है। प्रशिक्षण किसी भी संगठन को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम होता है। हालांकि राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रशिक्षक की विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। राठौड़ ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि राहुल गांधी किस प्रकार के प्रशिक्षक हैं, यह बात पूरी दुनिया जानती है।

राजनीतिक मुद्दों के अलावा मदन राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का भी उल्लेख किया। रविवार को प्रदेश बीजेपी कार्यालय में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रभावी अभियान बन चुका है। उनके अनुसार इस कार्यक्रम के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे नवाचार, सामाजिक पहल और प्रेरणादायक कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार ऐसे विषयों को सामने लाते हैं, जो समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में मदद करते हैं। राठौड़ का मानना है कि ‘मन की बात’ ने आम लोगों को भी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कुल मिलाकर मदन राठौड़ के ताजा बयान ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर उन्होंने आरएलपी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपने ऊपर हमले की आशंका जताई है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक मर्यादा, विपक्ष की भूमिका और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी है। आने वाले दिनों में इस विवाद को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा अब चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading