देशभर के इंजीनियरिंग छात्रों के बीच इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IITs में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) को लेकर सबसे ज्यादा आकर्षण देखने को मिलता है। हर साल लाखों छात्र जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर IITs की प्रतिष्ठित CSE ब्रांच में प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते अवसर, ऊंचे पैकेज और ग्लोबल स्तर पर बढ़ती मांग के कारण कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग को IITs की सबसे लोकप्रिय शाखा माना जाता है। यही वजह है कि JoSAA काउंसलिंग के दौरान इस ब्रांच की सीटों के लिए सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।
देश के 23 IITs में कुल मिलाकर लगभग 18 हजार से अधिक सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की सीटें सबसे सीमित और सबसे ज्यादा मांग वाली मानी जाती हैं। JoSAA के पिछले वर्ष के सीट मैट्रिक्स के अनुसार IITs में CSE की कुल 2129 सीटें उपलब्ध थीं। इनमें सामान्य, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी-एनसीएल, एससी और एसटी कैटेगरी के लिए अलग-अलग सीटें निर्धारित की गई थीं। इसके अलावा छात्राओं के लिए अतिरिक्त सुपरन्यूमरी सीटें भी शामिल थीं, जिनका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना है।
IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT कानपुर, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर जैसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में कंप्यूटर साइंस सीटों की सबसे अधिक मांग रहती है। इन संस्थानों में सीटों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद कटऑफ बेहद ऊंची जाती है। उदाहरण के तौर पर IIT बॉम्बे में ओपन कैटेगरी के लिए 61 सीटें हैं, जबकि IIT कानपुर में 40 और IIT दिल्ली में 31 सीटें निर्धारित हैं। हालांकि इन सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक होती है कि केवल टॉप रैंक हासिल करने वाले छात्रों को ही प्रवेश मिल पाता है।
IIT-BHU वाराणसी, IIT खड़गपुर और IIT-ISM धनबाद जैसे संस्थानों में भी कंप्यूटर साइंस की सीटें छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वहीं नए IITs जैसे IIT भिलाई, IIT गोवा, IIT जम्मू, IIT धारवाड़ और IIT तिरुपति में सीटों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इन संस्थानों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में नए IITs के प्लेसमेंट और रिसर्च प्रदर्शन में सुधार के कारण छात्र अब वहां भी कंप्यूटर साइंस ब्रांच को प्राथमिकता देने लगे हैं।
JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि केवल अच्छी रैंक हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही चॉइस फिलिंग और सीट मैट्रिक्स की समझ भी जरूरी होती है। काउंसलिंग के दौरान छात्रों को अपनी रैंक, पसंदीदा संस्थान, ब्रांच और कैटेगरी के अनुसार विकल्प भरने होते हैं। कई बार थोड़ी सी रणनीतिक गलती के कारण छात्रों को मनचाही ब्रांच नहीं मिल पाती।
विशेषज्ञों के अनुसार JoSAA काउंसलिंग के पहले राउंड में ही IITs की अधिकांश कंप्यूटर साइंस सीटें भर जाती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि CSE ब्रांच को लेकर छात्रों की पहली पसंद लगभग हर IIT में एक जैसी होती है। यही वजह है कि शुरुआती राउंड्स में कटऑफ बेहद ऊंची रहती है। बाद के राउंड्स में आमतौर पर अन्य ब्रांचों की सीटों पर ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है, जबकि कंप्यूटर साइंस सीटों में सीमित मूवमेंट ही होता है।
IITs में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की बढ़ती लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण टेक्नोलॉजी सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे अवसर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। IITs के CSE छात्रों को देश और विदेश की बड़ी टेक कंपनियों से करोड़ों रुपये तक के पैकेज मिलने की खबरें भी छात्रों को इस ब्रांच की ओर आकर्षित करती हैं।
इसके अलावा IITs का मजबूत एलुमनाई नेटवर्क, रिसर्च सुविधाएं और उद्योगों के साथ बेहतर संबंध भी कंप्यूटर साइंस शाखा को अन्य ब्रांचों की तुलना में अधिक लोकप्रिय बनाते हैं। कई छात्र स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहते हैं, जहां कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई उन्हें तकनीकी और व्यावसायिक दोनों तरह की समझ प्रदान करती है।
JoSAA सीट मैट्रिक्स के अनुसार छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था भी की गई है। इन अतिरिक्त सीटों के कारण अब बड़ी संख्या में छात्राएं भी IITs में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं। सरकार और संस्थानों का उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में लैंगिक संतुलन को बेहतर बनाना है।
जेईई एडवांस्ड 2026 का परिणाम जून के पहले सप्ताह में जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें लाखों छात्र हिस्सा लेंगे। ऐसे में छात्रों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि केवल रैंक ही नहीं, बल्कि सीट मैट्रिक्स और सही प्राथमिकता निर्धारण भी उनके एडमिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि छात्र पिछले वर्षों के कटऑफ ट्रेंड, सीट उपलब्धता और संस्थानों की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए चॉइस फिलिंग करें। कई बार छात्र केवल लोकप्रिय IITs पर फोकस करते हैं और अन्य अच्छे विकल्पों को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि नए IITs में भी अब बेहतर अकादमिक सुविधाएं और प्लेसमेंट अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
कुल मिलाकर IITs में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग आज भी देश की सबसे प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी शाखा बनी हुई है। सीमित सीटों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच छात्रों के लिए सही रणनीति, बेहतर रैंक और JoSAA काउंसलिंग की समझ बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।


