राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही तकनीकी समस्याएं सामने आने लगी हैं। Devasthan Department Rajasthan द्वारा संचालित इस योजना के तहत राज्य के हजारों वरिष्ठ नागरिक धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकेंगे, लेकिन आवेदन पोर्टल पर आ रही तकनीकी खामियों के कारण बुजुर्गों और उनके परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई आवेदकों ने शिकायत की है कि पहली बार आवेदन करने के बावजूद सिस्टम उन्हें पहले से आवेदन कर चुका बता रहा है, जिससे उनका आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा।
योजना के लिए बुधवार से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। आवेदन शुरू होते ही बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक और उनके परिजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने पहुंचे, लेकिन अंतिम चरण में आवेदन अटकने लगे। कई लोगों ने बताया कि वे जनआधार नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी भरने के बाद जैसे ही आवेदन सबमिट करते हैं, स्क्रीन पर एक संदेश दिखाई देता है कि “यह सदस्य पहले ही आवेदन कर चुका है। नियमानुसार एक सदस्य जीवन में केवल एक बार आवेदन कर सकता है।” समस्या यह है कि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने पहले कभी इस योजना का लाभ नहीं लिया और पहली बार आवेदन कर रहे हैं।
तकनीकी गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों को बार-बार ई-मित्र केंद्रों और साइबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों ने बताया कि पोर्टल पर डेटा खुलने के बावजूद अंतिम चरण में आवेदन रिजेक्ट हो रहा है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि उनका आवेदन सफलतापूर्वक जमा हुआ है या नहीं। बुजुर्ग आवेदकों के लिए यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें आवेदन प्रक्रिया के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
राजस्थान सरकार की यह योजना राज्य के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे लोकप्रिय योजनाओं में मानी जाती है। हर साल हजारों बुजुर्गों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा करवाई जाती है। इस बार योजना के तहत 50 हजार वरिष्ठ नागरिकों को एसी ट्रेन के जरिए देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाई जाएगी। इसके अलावा 6 हजार यात्रियों को नेपाल स्थित प्रसिद्ध Pashupatinath Temple के दर्शन हवाई यात्रा के माध्यम से करवाए जाएंगे।
देवस्थान विभाग ने इस बार आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी है। आवेदन केवल विभाग के पोर्टल और ई-मित्र केंद्रों के जरिए ही किए जा रहे हैं। आवेदन के लिए जनआधार कार्ड अनिवार्य किया गया है। आवेदकों को अपनी पसंद के तीन तीर्थ स्थलों का चयन वरीयता क्रम में करना होगा। साथ ही आवेदन के दौरान दो ऐसे व्यक्तियों के नाम और मोबाइल नंबर भी देने होंगे जिनसे आपात स्थिति में संपर्क किया जा सके।
योजना के नियमों के अनुसार केवल वही लोग आवेदन कर सकते हैं जो राजस्थान के मूल निवासी हों और जिनकी उम्र 1 अप्रैल 2026 तक 60 वर्ष या उससे अधिक हो। इसके अलावा आवेदक और उसका जीवनसाथी आयकरदाता नहीं होना चाहिए। केंद्र या राज्य सरकार के रिटायर्ड राजपत्रित अधिकारी इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। योजना के नियम यह भी कहते हैं कि जो व्यक्ति पहले इस योजना का लाभ ले चुका है, वह दोबारा आवेदन नहीं कर सकता। इसी आधार पर पोर्टल पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। हालांकि अब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां पहली बार आवेदन करने वालों को भी पहले लाभ ले चुका बताया जा रहा है।
इस तकनीकी समस्या को लेकर विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। Ratan Lal ने बताया कि यदि पोर्टल पर इस प्रकार की तकनीकी दिक्कत आ रही है तो विभाग की टेक्निकल टीम से संपर्क कर जल्द समाधान करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का पहले लॉटरी में चयन हो चुका था और विभाग की ओर से कॉल जाने के बावजूद उन्होंने यात्रा नहीं की, उन्हें इस प्रकार का संदेश दिखाई दे सकता है। हालांकि यदि पहली बार आवेदन करने वाले लोगों को भी यह समस्या आ रही है तो मामले की जांच कर सुधार किया जाएगा।
योजना के तहत जिन प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाई जाएगी उनमें Haridwar, Ayodhya, Varanasi, Somnath Temple, Tirupati Temple, Jagannath Temple, Vaishno Devi और Golden Temple जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शामिल हैं। इसके अलावा उज्जैन, ओंकारेश्वर, रामेश्वरम, मदुरई, गंगासागर, द्वारका, गोवा के चर्च और नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा भी योजना में शामिल की गई है।
नेपाल यात्रा के लिए यात्रियों को पहले बस के जरिए जयपुर से दिल्ली ले जाया जाएगा और वहां से हवाई जहाज के माध्यम से काठमांडू पहुंचाया जाएगा। विभाग का मानना है कि यह योजना राज्य के बुजुर्गों को धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें सम्मानजनक यात्रा सुविधा देने का प्रयास है।
आवेदन प्रक्रिया 10 जून 2026 तक जारी रहेगी। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि विभाग जल्द ही पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करेगा ताकि पात्र वरिष्ठ नागरिक बिना किसी परेशानी के आवेदन कर सकें। फिलहाल बड़ी संख्या में लोग समाधान का इंतजार कर रहे हैं और चाहते हैं कि सरकार इस समस्या को जल्द ठीक करे ताकि बुजुर्गों को बार-बार कार्यालयों और ई-मित्र केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।


