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राजस्थान बॉर्डर पर बनेगा हाईटेक सुरक्षा ग्रिड, सीमा गांवों की बदलेगी तस्वीर

राजस्थान बॉर्डर पर बनेगा हाईटेक सुरक्षा ग्रिड, सीमा गांवों की बदलेगी तस्वीर

राजस्थान की पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा अब देश की सबसे आधुनिक और हाईटेक सीमाओं में शामिल होने जा रही है। केंद्र सरकार ने सीमाई सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की दिशा में बड़ा खाका तैयार किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  के बीकानेर दौरे के बाद सीमा सुरक्षा को लेकर नई रणनीति पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत अब केवल बीएसएफ या सेना ही नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों और प्रशासन को भी सीमा सुरक्षा का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा। केंद्र सरकार ने इसे “चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड” का नाम दिया है, जिसके जरिए पाकिस्तान सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर चौतरफा निगरानी रखी जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री दो दिवसीय दौरे पर बीकानेर पहुंचे थे, जहां उन्होंने सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा की। इस दौरान श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और फलौदी सहित राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ, ड्रग्स तस्करी, साइबर अपराध और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए नई रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक के बाद राजस्थान बॉर्डर की सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव की तस्वीर साफ दिखाई देने लगी है।

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय भारत-पाक सीमा से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई को लेकर लिया गया। गृह मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के संदिग्ध या अवैध निर्माण को तुरंत हटाया जाए। केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि इससे सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही सीमा क्षेत्र में सक्रिय तस्करी नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर भी बड़ा अभियान चलाया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि बीएसएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और राज्य की एजेंसियां मिलकर संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगी। फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स, नकली आधार कार्ड और संदिग्ध फंडिंग के मामलों की गहराई से जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि सीमा क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध आर्थिक गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाए।

गृह मंत्री ने साइबर अपराध को भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने 1930 साइबर हेल्पलाइन के प्रभावी उपयोग और नए आपराधिक कानूनों के सख्त क्रियान्वयन पर जोर दिया। केंद्र सरकार का मानना है कि आज सीमा पार से साइबर माध्यमों का इस्तेमाल कर भी अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है, इसलिए तकनीकी निगरानी और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

बीकानेर के सांचू पोस्ट पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के नए मॉडल का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब सीमा सुरक्षा केवल हथियारों और जवानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की भागीदारी से इसे और मजबूत बनाया जाएगा। इसी सोच के तहत “चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड” तैयार किया जा रहा है। इस मॉडल में बीएसएफ, सेना, प्रशासन और जागरूक स्थानीय नागरिक मिलकर सीमा की निगरानी करेंगे। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती गांवों के लोग किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सबसे पहले जानकारी दे सकते हैं, इसलिए उन्हें सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।

राजस्थान की सीमा को ड्रोन रोधी बनाने की दिशा में भी तेजी से काम शुरू हो गया है। हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हथियार, नशीले पदार्थ और अन्य संदिग्ध सामग्री भेजने के कई मामले सामने आए हैं। इसे देखते हुए सीमा पर आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अगले छह महीनों में इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा सीमा पर नई तकनीक वाली फेंसिंग भी लगाई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ को रोका जा सके।

सीमावर्ती इलाकों में जवानों की आवाजाही और निगरानी को आसान बनाने के लिए सड़क नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। करीब 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इन सड़कों के बनने से सीमा चौकियों तक पहुंच आसान होगी और सुरक्षा बल किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे। इसके साथ ही बीएसएफ चौकियों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। महिला जवानों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त बैरकों का निर्माण भी योजना का हिस्सा है।

केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों को केवल सुरक्षा की दृष्टि से नहीं, बल्कि विकास के मॉडल के रूप में भी तैयार करना चाहती है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत राजस्थान के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों को चुना गया है। इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में बड़े स्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे। प्रत्येक गांव पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य इन गांवों को देश की अंतिम सीमा नहीं, बल्कि पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में विकसित करना है।

राज्य सरकार भी मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम के माध्यम से सीमाई इलाकों के विकास को गति दे रही है। इस योजना के तहत 1200 से अधिक गांवों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे से जुड़े हजारों विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का मानना है कि जब सीमावर्ती गांव आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगे, तभी सीमा सुरक्षा भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

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