किशनगढ़ में सोशल मीडिया के जरिए होने वाली साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया है कि ऑनलाइन दोस्ती किस तरह लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान पहुंचा सकती है। फेसबुक पर विदेशी महिला से हुई दोस्ती ने एक स्थानीय युवक की जिंदगी को परेशानी में डाल दिया और शातिर साइबर ठगों ने उसे कस्टम ड्यूटी, अस्पताल खर्च और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर 10 लाख 82 हजार 500 रुपये की ठगी कर ली। इस पूरे मामले में अब अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय किशनगढ़ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित की होल्ड की गई राशि वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार किशनगढ़ के खोड़ा गणेश रोड निवासी एक व्यक्ति की कुछ समय पहले फेसबुक पर ‘हेलेन जेम्स’ नाम की कथित विदेशी महिला से जान-पहचान हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन धीरे-धीरे महिला ने युवक का विश्वास जीत लिया। उसने खुद को लंदन निवासी बताया और कहा कि वह भारत घूमने आना चाहती है। महिला ने युवक को विश्वास दिलाया कि वह 3 अगस्त 2025 को भारत पहुंचेगी और उससे मुलाकात भी करेगी। लगातार बातचीत के कारण युवक को लगा कि वह एक वास्तविक विदेशी महिला से संपर्क में है।
कुछ दिनों बाद युवक के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का वरिष्ठ कस्टम अधिकारी बताया। उसने युवक से कहा कि उसकी परिचित हेलेन जेम्स लंदन से भारत पहुंच चुकी है, लेकिन एयरपोर्ट पर उसे रोक लिया गया है। कथित अधिकारी ने बताया कि महिला के पास भारी मात्रा में महंगे सामान और विदेशी मुद्रा है, जिसकी कस्टम ड्यूटी जमा नहीं हुई है। ठग ने युवक को डराते हुए कहा कि यदि तुरंत पैसे जमा नहीं करवाए गए तो महिला के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और उसका नाम भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस झंझट के डर से युवक घबरा गया। आरोपियों ने उसे अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया। युवक ने विश्वास में आकर पहली रकम जमा कर दी। इसके बाद ठगों ने लगातार नई-नई कहानियां बनाकर उससे पैसे मांगने शुरू कर दिए। कभी कस्टम क्लियरेंस शुल्क तो कभी विदेशी मुद्रा बदलने के नाम पर रकम मांगी गई।
जब आरोपियों को लगा कि युवक पूरी तरह उनके जाल में फंस चुका है, तब उन्होंने एक नया नाटक शुरू किया। युवक को बताया गया कि हेलेन जेम्स से पूछताछ की जा रही है और अब आगे की बातचीत ‘कोमल उर्फ सोनू सिंह’ नाम की कर्मचारी करेगी। इसके बाद महिला बनकर बात करने वाली ठग ने युवक को फोन कर बताया कि हिरासत के दौरान हेलेन जेम्स की अचानक तबीयत बिगड़ गई है और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। युवक को भरोसा दिलाने के लिए व्हाट्सएप पर अस्पताल जैसी दिखने वाली तस्वीरें और ड्रिप लगे हाथों की फोटो भी भेजी गईं।
इसके बाद युवक को भावनात्मक और कानूनी दोनों तरह से डराया गया। उसे कहा गया कि विदेशी महिला उससे मिलने भारत आई थी, इसलिए उसके इलाज का खर्च भी उसे ही उठाना होगा। ठगों ने धमकी दी कि यदि महिला को कुछ हो गया तो उसे जेल भेज दिया जाएगा और उसके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज हो सकता है। लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव के कारण युवक डर गया और उसने अपने बैंक ऑफ बड़ौदा तथा एचडीएफसी बैंक खातों से आरोपियों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करना जारी रखा।
कुछ समय बाद युवक को शक हुआ और उसने पूरे मामले की जानकारी जुटाने की कोशिश की। जांच करने पर सामने आया कि हेलेन जेम्स नाम की महिला कभी भारत आई ही नहीं थी और फेसबुक प्रोफाइल भी पूरी तरह फर्जी थी। तब जाकर युवक को एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का शिकार हो चुका है। आरोपियों ने भावनात्मक विश्वास, कानूनी डर और बीमारी जैसी संवेदनशील बातों का इस्तेमाल कर उससे 10 लाख 82 हजार 500 रुपये की बड़ी रकम ठग ली।
ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के आधार पर साइबर सेल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों के बैंक खातों में मौजूद 1 लाख 56 हजार 686 रुपये की राशि को होल्ड करवा दिया। हालांकि स्थानीय स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं होने से पीड़ित को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसके बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय किशनगढ़ में अधिवक्ता जटाशंकर तिवारी और प्रदीप चौधरी ने पीड़ित की ओर से पक्ष रखा। अदालत को बताया गया कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह आम लोगों को सोशल मीडिया के जरिए फंसाकर खुद को कस्टम अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी बताकर ठगी कर रहा है। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और दलीलों को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए किशनगढ़ थाना पुलिस को तत्काल मामला दर्ज कर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने पीड़ित को राहत देते हुए साइबर सेल द्वारा होल्ड की गई 1.56 लाख रुपये की राशि को वापस लौटाने का आदेश भी जारी किया है। इस आदेश को साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। साथ ही यह मामला आम लोगों के लिए भी चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि साइबर अपराधी भावनात्मक संबंध और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं।


