मध्य प्रदेश के रीवा में दो आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना और उनके देवलोक गमन की घटना को लेकर देशभर के जैन समाज में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में सोमवार को अजमेर में सकल जैन समाज के तत्वावधान में विशाल मौन जुलूस निकालकर संतों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया। बड़ी संख्या में समाज के लोग इस जुलूस में शामिल हुए और संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
मौन जुलूस की शुरुआत सुबह 9 बजे डाक बंगला स्थित जिला परिषद के पास से हुई। समाज के विभिन्न संगठनों, महिला मंडलों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने शांतिपूर्ण तरीके से इस रैली में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान लोगों ने मौन रहकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ आगे बढ़ा, जहां लोगों के हाथों में संत सुरक्षा से जुड़े संदेश लिखी तख्तियां और बैनर दिखाई दिए। समाज के लोगों ने इस दौरान प्रशासन और सरकार से मांग की कि विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर विशेष नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सकल जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि पांच दिन पहले रीवा में दो आर्यिका माताजी के साथ हुई दुर्घटना में दोनों का देवलोक गमन हो गया था। इस घटना ने पूरे जैन समाज को झकझोर कर रख दिया है। समाज के लोगों का कहना है कि संत और साधु-संत समाज के आध्यात्मिक मार्गदर्शक होते हैं, जिनका जीवन त्याग, तपस्या और अहिंसा पर आधारित होता है। ऐसे संतों के साथ हुई दुर्घटना केवल एक समाज की पीड़ा नहीं बल्कि पूरे देश की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा विषय है।
रैली के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृहमंत्री, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में संतों की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग रखी गई। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं समाज में असुरक्षा और असंतोष का कारण बन सकती हैं।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर से बाहर होने के बावजूद वीडियो कॉल के माध्यम से समाज के लोगों से संवाद किया। उन्होंने रैली में शामिल लोगों की भावनाओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि जैन समाज की मांगों और भावनाओं को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने दुर्घटना में दिवंगत हुई दोनों आर्यिका माताजी के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज देश की आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण आधार है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मौन जुलूस का नेतृत्व सकल जैन समाज के बैनर तले किया गया। इस दौरान समाज के विभिन्न पदाधिकारियों ने घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताते हुए सरकार से संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की मांग की। जैसवाल समाज के अध्यक्ष सुनील ढीलवारी ने कहा कि पूरे जैन समाज में इस घटना को लेकर भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि संतों के विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। यदि समय पर प्रभावी व्यवस्था होती तो शायद ऐसी घटना टाली जा सकती थी।
कार्यक्रम में मौजूद समाज के वरिष्ठ लोगों ने कहा कि साधु-संत पैदल विहार करते हैं और उनका जीवन पूरी तरह अनुशासन और धार्मिक नियमों पर आधारित होता है। ऐसे में उनके मार्गों पर यातायात नियंत्रण, प्रशासनिक समन्वय और पुलिस सहयोग अत्यंत आवश्यक है। समाज ने मांग की कि जिन क्षेत्रों से संतों का विहार होता है, वहां विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएं और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए।
बड़ा धड़ा पंचायत के अध्यक्ष प्रदीप पाटनी ने कहा कि समाज ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्यों का पता चल सके। समाज ने यह भी मांग की कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, जिससे जांच प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की साजिश या लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाज ने “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग करते हुए कहा कि विहाररत साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए। इसके अंतर्गत प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। समाज का कहना है कि वर्तमान समय में संतों की सुरक्षा को लेकर एक व्यवस्थित और राष्ट्रीय स्तर की नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
जैन समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” लागू करने की मांग भी उठाई। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा गाइडलाइन और SOP तैयार की जानी चाहिए, ताकि सभी राज्यों में एक समान सुरक्षा व्यवस्था लागू हो सके। साथ ही संतों के खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में शामिल करने की मांग भी की गई, जिससे ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई संभव हो सके।
मौन जुलूस में अशोक छाजेड़, सुरेश खिवसरा, प्रदीप पाटनी, विक्रम पारख, शिखर चंद जैन, पुखराज पहाड़िया, डिप्टी मेयर नीरज जैन, बसंत सेठी, डॉ. आर.के. गोधा, अजय दनगसिया, मिश्रीलाल गदिया, राकेश घीया, नितिन जैन, गौरव जैन, प्रवीण जैन, दीपक चोपड़ा, कमल गंगवाल, अजय साहुला और अनूप पूर्णा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान शांतिपूर्ण वातावरण देखने को मिला और समाज के लोगों ने एकजुट होकर संतों की सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की।


