भारत की रक्षा तकनीक लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। राजस्थान के जैसलमेर जिले स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण किया गया है। यह आधुनिक आत्मघाती ड्रोन न केवल लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है, बल्कि बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार अपने मिशन को संशोधित या रद्द भी कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञ इस परीक्षण को भारत की उन्नत सैन्य क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक बड़ी सफलता मान रहे हैं।
इस अत्याधुनिक ड्रोन को पुणे स्थित निजी रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी Nibe Limited ने विकसित किया है। कंपनी द्वारा तैयार किया गया ‘वायु अस्त्र-1’ आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना और सही अवसर मिलने पर सटीक हमला करना है। यह प्रणाली पारंपरिक मिसाइलों से अलग है क्योंकि यह लक्ष्य क्षेत्र में लंबे समय तक मंडरा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई कर सकती है।
जानकारी के अनुसार इस ड्रोन का परीक्षण अप्रैल 2026 में दो अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में किया गया था। पहला परीक्षण राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ, जहां रेगिस्तानी वातावरण में इसकी मारक क्षमता और लक्ष्य भेदन की सटीकता को परखा गया। इसके बाद उत्तराखंड के जोशीमठ-मलारी क्षेत्र में इसका दूसरा परीक्षण किया गया, जहां समुद्र तल से 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई और अत्यधिक ठंडे मौसम में इसकी उड़ान क्षमता और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। दोनों ही परीक्षणों में ड्रोन ने अपेक्षित परिणामों से बेहतर प्रदर्शन किया।
परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ ने अपनी पहली ही उड़ान में लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया। ड्रोन 10 किलोग्राम विस्फोटक भार के साथ उड़ान भर रहा था और उसने लक्ष्य पर अत्यंत सटीकता के साथ हमला किया। इसकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि इसका बेहद कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) रहा, जो एक मीटर से भी कम दर्ज किया गया। इसका अर्थ है कि ड्रोन निर्धारित लक्ष्य से लगभग बिना विचलित हुए सीधे उसी स्थान पर पहुंचा और अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।
आधुनिक युद्ध प्रणाली में केवल हमला करना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही आवश्यक होती है। ‘वायु अस्त्र-1’ को इसी सोच के साथ विकसित किया गया है। इसमें स्मार्ट मिशन कंट्रोल तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसकी मदद से उड़ान के दौरान भी मिशन को बदला जा सकता है। यदि लक्ष्य की स्थिति बदल जाती है या परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहतीं, तो ऑपरेटर मिशन को बीच में रोक सकता है। इतना ही नहीं, यदि पहला लक्ष्य अप्रासंगिक हो जाए तो ड्रोन को दूसरे लक्ष्य की ओर निर्देशित किया जा सकता है।
इस प्रणाली की एक और बड़ी विशेषता इसका सुरक्षित रिकवरी विकल्प है। यदि किसी कारणवश मिशन को पूरी तरह रद्द करना पड़े तो ड्रोन को वापस नियंत्रित कर सुरक्षित रूप से बेस पर उतारा जा सकता है। इससे रक्षा बलों को इस तकनीक का पुनः उपयोग करने का अवसर मिलता है और संसाधनों की बचत होती है। यह सुविधा अधिकांश पारंपरिक आत्मघाती हथियार प्रणालियों में उपलब्ध नहीं होती।
‘वायु अस्त्र-1’ की सबसे प्रभावशाली क्षमताओं में से एक इसकी लंबी अवधि तक हवा में सक्रिय रहने की क्षमता है। यह ड्रोन दुश्मन के क्षेत्र में 90 मिनट से अधिक समय तक मंडरा सकता है और लक्ष्य की तलाश करता रह सकता है। इसमें अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरे लगाए गए हैं, जो दिन और रात दोनों समय स्पष्ट निगरानी करने में सक्षम हैं। इन सेंसरों की सहायता से यह अंधेरे में भी टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और अन्य सैन्य लक्ष्यों की पहचान कर सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में रात के समय होने वाले ऑपरेशन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस ड्रोन का नाइट ऑपरेशन परीक्षण भी किया गया। परीक्षण के दौरान रात के घने अंधेरे में बख्तरबंद वाहनों और सैन्य लक्ष्यों की पहचान कर उन पर सटीक हमला करने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया गया। इस उपलब्धि से स्पष्ट होता है कि यह प्रणाली चौबीसों घंटे सक्रिय रहकर सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन क्षमता भी इस ड्रोन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। उत्तराखंड के कठिन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हुए परीक्षणों ने साबित किया कि यह कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड जैसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। भारत जैसे देश के लिए यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की सीमाएं रेगिस्तान से लेकर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों तक फैली हुई हैं।
परीक्षण के दौरान कंपनी ने मुख्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन से काफी दूरी पर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को ड्रोन का परिचालन नियंत्रण सफलतापूर्वक हस्तांतरित करने का प्रदर्शन भी किया। इससे यह सिद्ध हुआ कि युद्ध क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद सैन्य इकाइयां आवश्यकता पड़ने पर ड्रोन का नियंत्रण संभाल सकती हैं और मिशन को जारी रख सकती हैं।
‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह प्रणाली भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों को अधिक सटीक, लचीली और प्रभावी हमला क्षमता प्रदान कर सकती है। साथ ही यह उपलब्धि इस बात का भी प्रमाण है कि भारत अब अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों के विकास में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। आने वाले समय में ऐसी स्वदेशी प्रणालियां देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


