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जयपुर में पेट्रोल-डीजल महंगा, बढ़ती कीमतों से जनता परेशान

जयपुर में पेट्रोल-डीजल महंगा, बढ़ती कीमतों से जनता परेशान

राजस्थान की राजधानी जयपुर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को जारी नए रेट के अनुसार शहर में पेट्रोल की कीमत लगभग एक रुपए बढ़कर 108.84 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई, जबकि डीजल भी 92 पैसे महंगा होकर 94.12 रुपए प्रति लीटर हो गया। बीते पांच दिनों में दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण न केवल आम आदमी बल्कि ट्रांसपोर्ट, पर्यटन, खेती और छोटे कारोबारों से जुड़े लोग भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

शहर में नौकरीपेशा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहा है। रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लोगों का कहना है कि पहले ही महंगाई लगातार बढ़ रही थी, ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने मासिक खर्च और बढ़ा दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए बच्चों को स्कूल छोड़ने, बाजार जाने और रोजमर्रा के अन्य कामों का खर्च पहले की तुलना में कहीं ज्यादा हो गया है। कई लोगों का कहना है कि वे अब अपने गैरजरूरी सफर कम करने की सोच रहे हैं ताकि खर्च को नियंत्रित किया जा सके।

ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों पर भी इसका बड़ा असर दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यात्रियों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन ईंधन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। कई ड्राइवरों ने चिंता जताई कि अगर यही स्थिति बनी रही तो किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी हो जाएगी। हालांकि किराया बढ़ाने पर यात्रियों की संख्या कम होने का भी डर बना हुआ है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोग खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहे हैं।

लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट का तनाव पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है, तब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी क्यों की जा रही है। आम जनता का मानना है कि वैश्विक हालात सामान्य होने के बावजूद ईंधन के दाम बढ़ाना सीधे तौर पर लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है। कई लोगों ने सरकार और तेल कंपनियों से राहत देने की मांग भी की है।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़े बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियों के कारण कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया है। हालांकि आम लोगों के लिए यह तर्क राहत देने वाला नहीं दिख रहा, क्योंकि उनकी चिंता सीधे रोजमर्रा के खर्च से जुड़ी हुई है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर अब बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने के कारण सामान ढुलाई की लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा प्रभाव बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। लॉजिस्टिक सेक्टर से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने से ट्रकों और मालवाहक वाहनों का खर्च काफी बढ़ गया है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

पर्यटन उद्योग पर भी इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख पर्यटन राज्य माना जाता है। जोधपुर, उदयपुर और जयपुर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। लेकिन पेट्रोल और डीजल महंगा होने से लंबी दूरी की यात्रा का खर्च बढ़ने लगा है। ट्रैवल एजेंसियों और टूर ऑपरेटर्स का कहना है कि वाहन संचालन की लागत बढ़ने से पैकेज महंगे हो सकते हैं, जिसका असर पर्यटकों की संख्या पर पड़ सकता है। होटल और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग भी इसे लेकर चिंता जता रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों में डीजल की बढ़ती कीमतों का असर खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। कृषि कार्यों में ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य मशीनों के लिए डीजल की बड़ी मात्रा में जरूरत होती है। ऐसे में डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ गई है। सीमित सप्लाई और बढ़ते दामों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में परेशानी और ज्यादा बढ़ती दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही महंगी हो चुकी है और अब ईंधन के बढ़ते खर्च ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

राजधानी जयपुर समेत राजस्थान के कई हिस्सों में ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने किराया बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। यदि ऐसा होता है तो इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। बस सेवाओं, टैक्सी और माल ढुलाई के खर्च में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और इजाफा हुआ, तो इसका असर पूरे बाजार और उपभोक्ता खर्च पर देखने को मिलेगा।

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