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दिनेश बिवाल ने 10 लाख में बेटे के लिए खरीदा NEET UG का पेपर

दिनेश बिवाल ने 10 लाख में बेटे के लिए खरीदा NEET UG का पेपर

जयपुर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 से जुड़े पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को लगातार नए और चौंकाने वाले तथ्य मिल रहे हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पूछताछ में सामने आए खुलासों ने पूरे शिक्षा तंत्र और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान आरोपी दिनेश बिवाल से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनमें यह दावा किया गया है कि उसने अपने बेटे को परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए कथित रूप से करीब 10 लाख रुपये खर्च कर लीक प्रश्नपत्र हासिल किया था। हालांकि, हैरानी की बात यह रही कि इतना बड़ा सौदा करने के बावजूद उसका बेटा परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया और केवल 107 अंकों तक ही सीमित रह गया।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने दिनेश बिवाल से पूछताछ के दौरान कई डिजिटल सबूत और चैट रिकॉर्ड भी खंगाले हैं। इनमें कथित तौर पर प्रश्नपत्र की खरीद-फरोख्त और छात्रों तक उसे पहुंचाने से जुड़े कई संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के उद्देश्य से इस नेटवर्क का सहारा लिया था। लेकिन परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि लीक प्रश्नपत्र का भी कोई खास फायदा उसे नहीं मिल सका। इसी बीच सोशल मीडिया पर ऋषि बिवाल की मार्कशीट भी वायरल हो रही है, जिसमें उसे ग्रेस मार्क्स के जरिए पास होने की बात कही जा रही है।

जांच एजेंसियों की नजर अब केवल दिनेश बिवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पूरे परिवार और उससे जुड़े लोगों की गतिविधियों पर भी रखी जा रही है। दरअसल, वर्ष 2025 में NEET परीक्षा परिणाम आने के बाद दिनेश बिवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया था कि उसके परिवार के पांच बच्चों ने एक साथ मेडिकल परीक्षा में सफलता हासिल की है। उस समय यह उपलब्धि चर्चा का विषय बनी थी, लेकिन अब जांच एजेंसियों को संदेह है कि पिछले वर्षों में भी इसी तरह के नेटवर्क का इस्तेमाल कर बच्चों को परीक्षा में फायदा पहुंचाया गया हो सकता है। इसी कारण परिवार के अन्य सदस्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक का यह मामला किसी एक राज्य या व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था। जांच एजेंसियों को ऐसे कई डिजिटल सबूत मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रश्नपत्र और संभावित सवालों को साझा करने के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि परीक्षा से पहले छात्रों तक PDF फाइलों के रूप में प्रश्नपत्र या संभावित प्रश्नों की सूची पहुंचाई जाती थी। कई मामलों में 500 से 600 संभावित प्रश्न छात्रों को उपलब्ध कराए जाने की बात भी सामने आई है।

सीबीआई को यह भी जानकारी मिली है कि राजस्थान के सीकर में एक फ्लैट को इस पूरे नेटवर्क के संचालन का केंद्र बनाया गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी स्थान से कई गतिविधियों को संचालित किया जाता था और विभिन्न राज्यों में छात्रों तथा एजेंटों से संपर्क स्थापित किए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क में कुछ लोग “कोरियर” की भूमिका निभा रहे थे, जिनका काम कथित लीक पेपर या उससे जुड़ी जानकारी को छात्रों तक पहुंचाना था। दिनेश बिवाल और उसके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी इसी प्रकार की भूमिका निभाने का आरोप लगाया जा रहा है।

एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 150 छात्रों की एक सूची तैयार की गई है, जिनके इस नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। इन छात्रों और उनके परिजनों से भी पूछताछ की तैयारी की जा रही है। जांच में पैसों के लेन-देन के कई सुराग भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि कुछ छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा में मदद पहुंचाने का वादा किया गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए संपर्क स्थापित कर सौदे तय किए जाते थे और फिर अलग-अलग माध्यमों से प्रश्नपत्र या संभावित प्रश्न उपलब्ध कराए जाते थे।

CBI ने अदालत में यह भी बताया कि मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजिटल सबूत मिटाने और जांच को प्रभावित करने की कोशिशों के भी संकेत मिले हैं। कई आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि कई महत्वपूर्ण डेटा को डिलीट करने की कोशिश की गई, ताकि नेटवर्क के बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचने से रोका जा सके। इसी आधार पर अदालत ने कुछ आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेजा है, ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके।

जांच के दौरान यह भी पता चला है कि इस रैकेट का नेटवर्क राजस्थान के अलावा नासिक, गुरुग्राम और अन्य शहरों तक फैला हुआ था। विभिन्न राज्यों में सक्रिय एजेंट छात्रों और अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें परीक्षा में सफलता का भरोसा दिलाते थे। एजेंसियों को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ अंदरूनी लोगों की भूमिका भी हो सकती है, जिनकी मदद से प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचाई जाती थी।

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