राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की हालत गंभीर होने के मामले ने प्रदेश की राजनीति और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अस्पताल में हुई लापरवाही को अक्षम्य बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को तुरंत इस पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने गुरुवार को जारी अपने बयान में कहा कि अस्पताल में भर्ती प्रसूताएं पूरी रात दर्द और तकलीफ में तड़पती रहीं, लेकिन उनकी ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता के बावजूद सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है। गहलोत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी अनदेखी हैं। उन्होंने इसे बेहद दुखद और चिंताजनक बताया।
जानकारी के अनुसार कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नए अस्पताल में ऑपरेशन के बाद भर्ती की गई कई प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। शुरुआती जानकारी में सामने आया कि महिलाओं में गंभीर संक्रमण और किडनी खराब होने जैसे लक्षण दिखाई देने लगे थे। इसके साथ ही उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगा और प्लेटलेट्स काउंट भी कम हो गया। कई मरीजों में यूरिन पास होना बंद हो गया, जिसके बाद स्थिति गंभीर बनती चली गई।
इस पूरे घटनाक्रम में अब तक दो प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। पहली मृतका की पहचान रावतभाटा निवासी पायल के रूप में हुई, जिसकी मंगलवार तड़के मौत हो गई थी। इसके बाद गुरुवार को दूसरी प्रसूता अनंतपुरा निवासी 20 वर्षीय ज्योति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि ज्योति का इलाज मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक स्थित नेफ्रोलॉजी आईसीयू में चल रहा था, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार 4 मई को अस्पताल में कुल 12 प्रसव हुए थे, जिनमें 10 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही छह प्रसूताओं की हालत अचानक बिगड़ने लगी। महिलाओं में एक जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।
मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि कई महिलाओं में किडनी फेल होने जैसी स्थिति पैदा हो गई। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड प्रेशर कम होना, प्लेटलेट्स तेजी से गिरना और शरीर से यूरिन का बंद हो जाना बेहद गंभीर संकेत माने जाते हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि ऑपरेशन के दौरान संक्रमण या दवाओं से जुड़ी कोई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने अभी तक किसी स्पष्ट कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इस घटना के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर हमला बोल रहा है और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है। अशोक गहलोत ने कहा कि यदि अस्पताल में इतनी बड़ी लापरवाही हुई है तो इसकी जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सिस्टम की इतनी बड़ी विफलता के बावजूद मुख्यमंत्री स्तर पर चुप्पी साध लेना बेहद असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से मांग की कि मामले की तुरंत निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों, अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आम जनता सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करती है और यदि वहां भी मरीज सुरक्षित नहीं रहेंगे तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती स्तर पर ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं, उपयोग में ली गई दवाओं और मेडिकल उपकरणों की जांच की जा रही है। साथ ही उन सभी स्वास्थ्यकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जो उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद थे। मेडिकल विशेषज्ञों की एक टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर एक साथ कई प्रसूताओं की तबीयत क्यों बिगड़ी।
इस घटना ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते मरीजों की स्थिति पर ध्यान दिया जाता तो शायद हालात इतने गंभीर नहीं होते। वहीं परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण मरीजों की हालत लगातार बिगड़ती गई।
कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रदेश के बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने आम लोगों में डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बेहद गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


