latest-newsअजमेरराजस्थान

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: APO भर्ती में लॉ डिग्री जरूरी

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: APO भर्ती में लॉ डिग्री जरूरी

सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती-2024 से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय सुना दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी अभ्यर्थी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि तक विधि स्नातक (लॉ) की डिग्री होना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार इस निर्धारित समय तक अपनी डिग्री पूरी नहीं करता है, तो उसका आवेदन मान्य नहीं माना जाएगा। इस निर्णय के साथ ही अदालत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया।

दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी जब RPSC ने 7 मार्च 2024 को APO के 181 पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया था कि उम्मीदवार के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक विधि स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। इसके बावजूद, कई ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया था, जिनकी डिग्री उस समय तक पूरी नहीं हुई थी और वे अंतिम वर्ष में अध्ययनरत थे।

बाद में आयोग ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा था कि जिन अभ्यर्थियों के पास निर्धारित समय तक आवश्यक योग्यता नहीं है, वे अपने आवेदन वापस ले लें। हालांकि, इस फैसले को कुछ अभ्यर्थियों ने चुनौती दी और मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट की एकल पीठ और बाद में खंडपीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय देते हुए कहा था कि यदि परीक्षा की तिथि तक उम्मीदवार अपनी डिग्री प्राप्त कर लेता है, तो उसे पात्र माना जा सकता है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भर्ती प्रक्रिया में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। एक ओर आयोग अपने नियमों के अनुसार पात्रता तय कर रहा था, वहीं दूसरी ओर अदालत के आदेश के कारण अंतिम वर्ष के छात्रों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल रही थी। इसी विरोधाभास को दूर करने के लिए RPSC ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट टिप्पणी की कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978 में वह प्रावधान पहले ही हटा दिया गया था, जो अंतिम वर्ष के छात्रों को आवेदन करने की अनुमति देता था। अदालत ने कहा कि अक्टूबर 2002 में इस नियम में संशोधन किया गया था और उसके बाद से केवल वही अभ्यर्थी पात्र माने जाते हैं, जिनके पास आवेदन के समय आवश्यक योग्यता उपलब्ध हो।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि भर्ती विज्ञापन की भाषा बिल्कुल स्पष्ट थी और उसमें किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं थी। इसलिए उम्मीदवारों को उसी के अनुसार आवेदन करना चाहिए था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थियों को इंटरव्यू या परीक्षा की तिथि तक योग्यता पूरी करने की छूट दी जाती है, तो इससे पूरी चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता पैदा होगी और प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

इस फैसले के बाद अब केवल वही अभ्यर्थी APO भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहेंगे, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि तक विधि स्नातक की डिग्री थी। RPSC के सचिव रामनिवास मेहता ने भी इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की एकल और खंडपीठ के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत अपात्र उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।

यह फैसला हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस भर्ती प्रक्रिया में 52 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इसका प्रारंभिक परीक्षा 19 जनवरी 2025 को आयोजित की गई थी, जबकि मुख्य परीक्षा 1 जून 2025 को हुई थी। अब इस निर्णय के बाद भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का रास्ता साफ हो गया है और आयोग योग्य उम्मीदवारों के चयन की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल इस विशेष भर्ती प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में होने वाली अन्य भर्तियों के लिए भी एक स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है। इससे यह संदेश गया है कि किसी भी सरकारी भर्ती में निर्धारित पात्रता शर्तों का सख्ती से पालन किया जाएगा और उसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading