राजनीतिक माहौल के बीच गोविंद सिंह डोटासरा ने देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजों को लेकर बड़ा बयान देते हुए क्षेत्रीय पार्टियों को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत रणनीति की जरूरत है और यह केवल कांग्रेस के नेतृत्व में ही संभव है। उनके अनुसार, यदि क्षेत्रीय दल अलग-अलग चुनाव लड़ने की रणनीति अपनाते हैं, तो उनका परिणाम भी पश्चिम बंगाल जैसा ही हो सकता है।
डोटासरा ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों को पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों से सबक लेना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वहां जो स्थिति बनी, वह इस बात का उदाहरण है कि बिखरे हुए विपक्ष के सामने बीजेपी को बढ़त मिल जाती है। उनके मुताबिक, क्षेत्रीय दलों की सोच अक्सर सीमित होती है और वे राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट रणनीति नहीं बना पाते, जिसका फायदा बीजेपी को मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी का मुकाबला करने की क्षमता रखती है। इसलिए क्षेत्रीय दलों को चाहिए कि वे अपने मतभेद भुलाकर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ें। डोटासरा ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो बीजेपी धीरे-धीरे इन क्षेत्रीय दलों को खत्म कर देगी। उन्होंने दिल्ली और बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
अपने बयान में डोटासरा ने केंद्रीय एजेंसियों और चुनावी संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहीं और उनका उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद केरल में कांग्रेस की जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है, जो यह दिखाता है कि जनता अभी भी सच्चाई को समझती है।
पश्चिम बंगाल के संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि वहां चुनाव के दौरान सत्ता का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में अधिकारियों का तबादला किया गया, जिससे प्रशासनिक संतुलन बिगड़ा। उनके अनुसार, करीब 438 अधिकारियों को बदला गया, जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के यहां ईडी की कार्रवाई की गई और उनकी पूरी जानकारी जुटाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों का भी गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और इससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा। उनके मुताबिक, यह स्थिति देश के लिए खतरनाक संकेत है, क्योंकि इससे मतदाताओं का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में वास्तविक जनादेश के बजाय वोटों की हेराफेरी के जरिए सरकार बनाई गई।
राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति यहां नहीं बनने दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने देगी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करेगी। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी बीजेपी की मनमानी को नहीं चलने दिया गया और आगे भी ऐसा ही किया जाएगा।
इसके अलावा, डोटासरा ने राज्य की मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तंज कसते हुए कहा कि वे केवल दिखावे की राजनीति कर रहे हैं और वास्तविक मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पंचायत और नगर निगम चुनाव कराने से बच रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
पंचायत चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव समय पर नहीं कराए जा रहे, जिससे लोकतंत्र की जड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने इसे सरकार की कमजोरी बताते हुए कहा कि जनता के बीच जाने से बचने के लिए चुनावों को टाला जा रहा है।
एसआई पेपर लीक मामले पर भी डोटासरा ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे करती रही कि दोषियों को पकड़ा जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन इससे उन युवाओं का क्या होगा जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की थी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन अभ्यर्थियों की उम्र अब सीमा पार कर चुकी है, उनके लिए सरकार क्या कदम उठाएगी। डोटासरा ने कहा कि राज्य सरकार इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है।


