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सोने में निवेश का ट्रेंड बदला, सिक्के और गोल्ड बार बने पहली पसंद

सोने में निवेश का ट्रेंड बदला, सिक्के और गोल्ड बार  बने पहली पसंद

भारत में सोना लंबे समय से केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में स्थापित हो चुका है। हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने इस धारणा को और मजबूत किया है। आज की स्थिति यह है कि जहां पहले लोग सोने के गहने खरीदने को प्राथमिकता देते थे, वहीं अब निवेश के उद्देश्य से सोने के सिक्के और गोल्ड बार खरीदने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। सोने की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ता के लिए गहने खरीदना अपेक्षाकृत महंगा बना दिया है। इसके चलते निवेशकों का रुझान अब ऐसे विकल्पों की ओर बढ़ रहा है, जहां उन्हें बेहतर रिटर्न के साथ-साथ अधिक लिक्विडिटी भी मिल सके। यही कारण है कि सोने के सिक्के और बार आज के समय में निवेश के लिए अधिक उपयुक्त विकल्प के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

वैश्विक स्तर पर सोने की मांग और निवेश के रुझानों पर नजर रखने वाली संस्था World Gold Council के आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट पुष्टि करते हैं। संस्था के अनुसार, भारत में पहली बार निवेश के लिए सोने की मांग, आभूषणों की मांग से अधिक हो गई है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो यह दर्शाता है कि उपभोक्ता अब सोने को केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि एक वित्तीय संपत्ति के रूप में देख रहे हैं।

हालिया आंकड़ों के अनुसार मार्च तिमाही में सोने में निवेश की मांग में पिछले वर्ष की तुलना में 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 82 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। इसके विपरीत, इसी अवधि में आभूषणों की मांग में लगभग 19.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 66 मीट्रिक टन पर सिमट गई। हालांकि इन दोनों के बीच अंतर के बावजूद भारत में सोने की कुल खपत में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 151 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि निवेश के रूप में सोने की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

अगर निवेश के नजरिए से देखा जाए तो सोने के विभिन्न विकल्पों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। सोने के सिक्के उन निवेशकों के लिए बेहतर माने जाते हैं, जो छोटे या मध्यम स्तर पर निवेश करना चाहते हैं। ये आमतौर पर 24 कैरेट शुद्धता में उपलब्ध होते हैं और इन्हें खरीदना तथा बेचना दोनों ही आसान होता है। सिक्कों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी उच्च लिक्विडिटी है, जिससे जरूरत पड़ने पर इन्हें आसानी से नकद में बदला जा सकता है।

दूसरी ओर, सोने के बार बड़े निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त विकल्प माने जाते हैं। इनमें निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन पर आमतौर पर मेकिंग चार्ज नहीं लगता, जिससे निवेश की लागत कम हो जाती है। इसके अलावा, बड़े आकार के बार में निवेश करने पर प्रति ग्राम कीमत भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है, जिससे यह लंबी अवधि के निवेश के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

वहीं, सोने के गहनों की बात करें तो ये आज भी सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन निवेश के लिहाज से इन्हें उतना लाभकारी नहीं माना जाता। गहनों पर मेकिंग चार्ज और डिजाइनिंग लागत जुड़ी होती है, जो खरीद के समय कीमत को बढ़ा देती है। जब इन्हें बेचने की बारी आती है, तो यह अतिरिक्त लागत वापस नहीं मिलती, जिससे निवेश पर मिलने वाला वास्तविक लाभ कम हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश के लिए सोने का चयन करते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य, बजट और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। यदि लक्ष्य केवल सुरक्षित निवेश और मूल्य वृद्धि है, तो सिक्के और बार अधिक उपयुक्त विकल्प हैं। वहीं, यदि उद्देश्य पहनने और पारंपरिक उपयोग का है, तो गहनों का चयन किया जा सकता है।

बाजार के मौजूदा रुझान यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में भी सोने में निवेश की मांग बढ़ती रहेगी। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी पहचान बनाए रखता है। यही कारण है कि खुदरा और संस्थागत दोनों प्रकार के निवेशक इसमें रुचि दिखा रहे हैं।

 भारत में सोने के प्रति लोगों का नजरिया तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत वित्तीय साधन बन चुका है। सिक्कों और बार की बढ़ती मांग इस बदलाव का स्पष्ट संकेत है और यह आने वाले समय में निवेश के नए रुझानों को भी दिशा दे सकता है।

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