राजस्थान ने अपनी पारंपरिक आतिथ्य संस्कृति ‘पधारो म्हारे देस’ को अब डिजिटल युग के अनुरूप नया रूप दे दिया है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विकसित ऑनलाइन बुकिंग मैनेजमेंट सिस्टम, जिसे OBMS के नाम से जाना जाता है, आज पर्यटन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है। यह प्लेटफॉर्म न केवल राज्य में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को सरल और सुविधाजनक बना रहा है, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी राजस्थान को अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा कर रहा है।
OBMS पोर्टल और मोबाइल ऐप ने पर्यटन की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। अब पर्यटकों को लंबी कतारों में लगने या अलग-अलग जगहों पर टिकट खरीदने की जरूरत नहीं रही। वे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न पर्यटन स्थलों के टिकट आसानी से बुक कर सकते हैं। यही कारण है कि यह प्लेटफॉर्म आज देश का एकमात्र ऐसा सरकारी डिजिटल सिस्टम बन गया है, जिसने पर्यटन को पूरी तरह डिजिटल और सहज बना दिया है।
इस प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसके उपयोग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अब तक करीब 3 करोड़ पर्यटक इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं और 90 लाख से अधिक बुकिंग्स की जा चुकी हैं। यह आंकड़े न केवल इसकी उपयोगिता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि डिजिटल माध्यम से पर्यटन सेवाएं किस तरह तेजी से स्वीकार की जा रही हैं।
इस अभिनव पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। वर्ष 2025 में OBMS को प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड के सिल्वर कैटेगरी में सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राज्य सरकार की ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है।
OBMS प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक ‘वन स्टॉप सेंटर’ के रूप में कार्य करता है। यहां केवल टिकट बुकिंग ही नहीं, बल्कि पर्यटकों को यात्रा से जुड़ी हर जरूरी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है। इस प्लेटफॉर्म से अब 100 से अधिक प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा चुका है, जिससे पर्यटक एक ही स्थान से विभिन्न ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों की योजना बना सकते हैं।
राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में आमेर किला, हवा महल और जंतर मंतर जयपुर जैसे प्रसिद्ध स्मारकों के टिकट अब इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा वन विभाग द्वारा संचालित सरिस्का टाइगर रिजर्व, झालाना लेपर्ड सफारी और नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जैसे प्राकृतिक स्थलों की बुकिंग भी इसी पोर्टल से की जा सकती है।
इतना ही नहीं, राजस्थान पर्यटन विकास निगम और अन्य एजेंसियों के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख स्थल जैसे सिलीसेढ़ लेक पैलेस और मसाला चौक भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय महत्व के चित्तौड़गढ़ किला, कुंभलगढ़ किला और भानगढ़ किला जैसे ऐतिहासिक स्थलों को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे पर्यटकों को व्यापक विकल्प मिलते हैं।
OBMS की विशेषता केवल इसकी व्यापकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उपलब्ध स्मार्ट सुविधाएं इसे और भी उपयोगी बनाती हैं। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस व्यवस्था को बढ़ावा देता है, जहां क्यूआर कोड आधारित ई-टिकट और डिजिटल बोर्डिंग पास का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा क्यूआर आधारित ऑडियो गाइड, इंटरएक्टिव मैप और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं पर्यटकों को एक आधुनिक और समृद्ध अनुभव प्रदान करती हैं।
इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विभिन्न पैकेज विकल्प भी पर्यटकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। ‘जयपुर पैकेज’ और ‘राजस्थान पैकेज’ जैसे कम्पोजिट टिकटिंग विकल्पों के माध्यम से पर्यटक एक ही बार में कई स्थलों की बुकिंग कर सकते हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है। इसके अलावा आसान कैंसलेशन और त्वरित रिफंड की सुविधा इसे और भी विश्वसनीय बनाती है।
राज्य सरकार इस डिजिटल पहल को और अधिक विस्तार देने की दिशा में भी काम कर रही है। आने वाले समय में राजस्थान पर्यटन विकास निगम के होटलों की बुकिंग और जवाहर कला केंद्र में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के टिकट भी इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही राजस्थान के बाहर स्थित लगभग 150 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्मारकों को भी इस सिस्टम से जोड़ा जा चुका है, जिससे इसका दायरा और व्यापक हो जाएगा।


