राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित इस प्रेस वार्ता में डोटासरा ने कहा कि बीजेपी नेताओं को यह भरोसा है कि जिस तरह उन्होंने पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर धांधली कर चुनाव जीता, उसी रणनीति को वे राजस्थान में भी लागू करना चाहते हैं।
डोटासरा ने अपने बयान में कहा कि इसी मानसिकता के कारण प्रदेश की सरकार जनता के हितों में काम करने के बजाय चुनावी रणनीतियों में व्यस्त है। उन्होंने बीजेपी को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता संविधान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनका कहना था कि “हम जान दे सकते हैं, लेकिन संविधान पर आंच नहीं आने देंगे।”
बंगाल चुनावों का जिक्र करते हुए डोटासरा ने आरोप लगाया कि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया गया। उन्होंने कहा कि वोटों की लूट, दबाव और दादागिरी के जरिए सरकार बनाई गई, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उनके मुताबिक चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हुआ और चुनाव आयोग की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह की साजिशों को कांग्रेस ने पहले भी नाकाम किया है और आने वाले चुनावों में भी ऐसा होने नहीं दिया जाएगा।
डोटासरा ने विशेष रूप से एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के जरिए लाखों मतदाताओं को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार करीब 1 करोड़ 36 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए और लगभग 20 लाख लोगों को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया, जिससे उन्हें मतदान का अधिकार नहीं मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को अपील करने का उचित मौका भी नहीं दिया गया, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक हस्तक्षेप का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान 400 से अधिक अधिकारियों का तबादला किया गया। उनका सवाल था कि क्या चुनाव आयोग ने कभी बीजेपी शासित राज्यों में इस तरह की कार्रवाई की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव और डीजीपी तक को बदला गया, जो चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
राजस्थान के मुद्दों पर बात करते हुए डोटासरा ने पेपर लीक मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि उसने पेपर लीक नहीं होने दिया, जबकि ढाई साल का समय बीत जाने के बावजूद दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने जगदीश बिश्नोई के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब स्थिति साफ हो चुकी है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों के बारे में कहा जा रहा था कि वे जेल से बाहर आते ही कांग्रेस नेताओं को अंदर कर देंगे, वही अब खुद जमानत पर बाहर हैं। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में गंभीरता से काम करने के बजाय इसे एक तमाशा बना चुकी है।
इसके अलावा उन्होंने एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। डोटासरा ने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया में जिन उम्मीदवारों ने मेहनत से परीक्षा पास की, उनके भविष्य को लेकर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने वादा किया था कि अन्य नौकरियों से आने वाले अभ्यर्थियों को राहत दी जाएगी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया गया। डोटासरा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। आगामी चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।


