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अजमेर अश्लील पोस्ट विवाद : BJP जिलाध्यक्ष रमेश सोनी पर जांच की मांग

अजमेर अश्लील पोस्ट विवाद : BJP जिलाध्यक्ष रमेश सोनी पर जांच की मांग

राजस्थान के अजमेर में सोशल मीडिया पर कथित अश्लील पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस नेता पीयूष सुराणा के नाम से जुड़े पोस्ट के बाद अब BJP के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी के खिलाफ भी जांच की मांग उठी है। कांग्रेस नेता के परिजनों और उनके समर्थकों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर जो आपत्तिजनक पोस्ट वायरल हुआ, उसे भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा री-पोस्ट किया गया, जो स्वयं में एक अपराध की श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि किसी भी अश्लील या अभद्र सामग्री को न केवल पोस्ट करना, बल्कि उसे साझा करना भी कानून के दायरे में आता है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने कहा कि उन्हें इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह रुख संकेत देता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और तथ्यों की पड़ताल के बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा।

वहीं, इस विवाद में घिरे भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने अपने पक्ष में बयान देते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है, बल्कि उन्होंने कांग्रेस के कथित चाल-चलन और चेहरा उजागर करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि अगर इसे अपराध माना जाता है, तो वे कानून के अनुसार जो भी कार्रवाई होगी, उसका सामना करने के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान इस पूरे मामले को और अधिक राजनीतिक बना रहा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

इस मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया, जब कांग्रेस नेता पीयूष सुराणा के भाई श्रेयांस सुराणा सहित अन्य लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में कहा गया कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से जानबूझकर अपने फेसबुक अकाउंट पर अश्लील और अभद्र सामग्री को री-पोस्ट किया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि इस पोस्ट के जरिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मर्यादा भंग करने का प्रयास किया गया।

शिकायत में एक और महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि जिस फेसबुक अकाउंट से मूल पोस्ट किया गया था, वह कथित रूप से हैक हो गया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वह पोस्ट पीयूष सुराणा द्वारा नहीं किया गया था, बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके अकाउंट का दुरुपयोग करते हुए उसे अपलोड किया। फिलहाल वह पोस्ट संबंधित अकाउंट से हटा दी गई है, लेकिन यह जांच का विषय बना हुआ है कि वह पोस्ट वास्तव में किसने किया था।

इस पूरे घटनाक्रम में शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए और केवल राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से उस पोस्ट को री-पोस्ट किया, जिससे न केवल एक व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि समाज में अश्लील सामग्री के प्रसार को भी बढ़ावा मिला। उन्होंने इसे महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बताया और इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

गौरतलब है कि यह विवाद पहले ही एक अन्य घटना के कारण चर्चा में आ चुका है। इस मामले में विरोध प्रदर्शन के दौरान स्याही फेंकने की घटना को लेकर भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भारती श्रीवास्तव सहित अन्य महिला पदाधिकारियों के खिलाफ गंज थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है। इससे साफ है कि यह विवाद अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़कों पर भी इसका असर देखने को मिला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में इस तरह के मामले तेजी से राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना और तथ्यों की सही जांच करना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके।

अजमेर का यह मामला भी इसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां एक ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही और कानून के अनुसार किसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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