भारत वैश्विक स्तर पर सैलरी वृद्धि के मामले में लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ है और वर्ष 2026 के लिए भी इसके सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। ताजा आकलनों के अनुसार देश में औसतन सैलरी बढ़ोतरी 9.1 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025 के 8.9 प्रतिशत के स्तर से थोड़ा अधिक है। यह वृद्धि दर दुनिया के कई विकसित देशों से काफी आगे है, जहां वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर अमेरिका में यह दर लगभग 4.3 प्रतिशत और ब्रिटेन में करीब 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत का रोजगार बाजार फिलहाल अधिक गतिशील और आकर्षक बना हुआ है।
यह अनुमान Aon द्वारा जारी वेतन वृद्धि और टर्नओवर सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में मजबूत घरेलू मांग और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वेतन वृद्धि का प्रमुख कारण बन रही है। विशेष रूप से रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कंपनियां तेजी से विस्तार कर रही हैं, जिसके चलते इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारतीय कंपनियां अब कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए अधिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रही हैं। नौकरी छोड़ने की दर, जिसे एट्रिशन रेट कहा जाता है, लगातार घट रही है और वर्ष 2025 में यह घटकर 16.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह दर कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर के काफी करीब मानी जा रही है। इससे पहले 2024 में यह 17.7 प्रतिशत और 2023 में 18.7 प्रतिशत थी। इस गिरावट से यह स्पष्ट होता है कि कर्मचारी अब पहले की तुलना में अधिक स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं और बार-बार नौकरी बदलने की प्रवृत्ति कम हो रही है।
वेतन वृद्धि के रुझानों पर नजर डालें तो यह पाया गया है कि सबसे अधिक लाभ जूनियर और एंट्री-लेवल कर्मचारियों को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन कर्मचारियों के वेतन में औसतन 9.6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि कंपनियां अब प्रतिभाशाली और कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए शुरुआती स्तर पर ही आकर्षक पैकेज ऑफर कर रही हैं। इससे न केवल टैलेंट को आकर्षित करने में मदद मिलती है, बल्कि कर्मचारियों की लंबे समय तक संगठन में बने रहने की संभावना भी बढ़ जाती है।
सेक्टरवार विश्लेषण से यह भी सामने आता है कि ऑटोमोबाइल और वाहन निर्माण उद्योग में सबसे अधिक वेतन वृद्धि हो रही है। इस क्षेत्र में 2025 में जहां 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, वहीं 2026 में यह बढ़कर 9.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिल रही है, जहां वेतन वृद्धि 8.4 प्रतिशत से बढ़कर 8.8 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। केमिकल और इंजीनियरिंग सेक्टर में भी इसी तरह की सकारात्मक प्रवृत्ति देखी जा रही है, जहां वेतन वृद्धि 8.5 प्रतिशत से बढ़कर 8.8 प्रतिशत तक होने का अनुमान है।
हालांकि, सभी क्षेत्रों में एक समान वृद्धि नहीं हो रही है। टेक कंसल्टिंग और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में वेतन वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। इस सेक्टर में औसतन वृद्धि दर लगभग 6.8 प्रतिशत के आसपास है, जो अन्य उद्योगों की तुलना में कम मानी जा रही है। इसका कारण वैश्विक स्तर पर टेक इंडस्ट्री में आ रही चुनौतियां और लागत नियंत्रण की रणनीतियां हो सकती हैं।
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रूपांक चौधरी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। यही कारण है कि यहां नौकरियों का मूल्यांकन अन्य बड़े देशों की तुलना में अधिक आकर्षक है। उनका मानना है कि आने वाले समय में भी भारत का रोजगार बाजार इसी तरह मजबूत बना रहेगा, बशर्ते कंपनियां अपने कर्मचारियों के कौशल विकास और करियर प्रगति पर ध्यान देती रहें।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अब कंपनियां केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कर्मचारियों के समग्र विकास पर ध्यान दे रही हैं। स्किल डेवलपमेंट, परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन और करियर ग्रोथ के अवसर जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जा रही है। दूसरी ओर कर्मचारी भी अब केवल अधिक वेतन के लिए नौकरी बदलने के बजाय स्थिरता, स्पष्ट भूमिका और बेहतर कार्य वातावरण को महत्व देने लगे हैं।


