राजस्थान में बार काउंसिल चुनाव-2026 के तहत 4 मई को होने वाली री-वोटिंग को लेकर प्रशासन और चुनाव प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी और रिटर्निंग अधिकारी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत न केवल चुनाव प्रचार पर सख्ती से रोक लगाई गई है, बल्कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
इस पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी में Supreme Court of India द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी की अहम भूमिका है, जिसने यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं कि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या बाहरी हस्तक्षेप न हो। 4 मई को जयपुर, जोधपुर और रायसिंहनगर में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान निर्धारित किया गया है। इससे पहले 17 मार्च को लागू की गई आचार संहिता के तहत 2 मई की रात 8 बजे से चुनाव प्रचार पूरी तरह बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
इस बार सख्ती का मुख्य कारण 22 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान सामने आई शिकायतें हैं। रिटर्निंग अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य द्वारा 1 मई को जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि पिछली वोटिंग के दौरान कई लॉ स्टूडेंट्स द्वारा चुनाव प्रचार में भाग लेने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसे गंभीरता से लेते हुए अब 4 मई की री-वोटिंग में कोर्ट परिसर और चुनाव क्षेत्र में लॉ स्टूडेंट्स तथा गैर-मतदाताओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इलेक्शन कमेटी ने इस मामले में सख्त चेतावनी भी जारी की है। यदि कोई उम्मीदवार अपने प्रचार में किसी लॉ स्टूडेंट या गैर-मतदाता को शामिल करता पाया जाता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित उम्मीदवार की उम्मीदवारी को निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही गैर-मतदाता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य चुनाव में बाहरी प्रभाव को पूरी तरह खत्म करना और केवल अधिकृत मतदाताओं को ही प्रक्रिया में शामिल करना है।
जयपुर में मतदान व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं, क्योंकि यहां सबसे अधिक मतदाता हैं। चुनाव समिति के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पोलिंग बूथ पर कुल 14,781 मतदाता पंजीकृत हैं। इतने बड़े स्तर पर मतदान को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए एक विशेष निगरानी समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही पुराने एपीओ को हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की कमी न रह जाए।
जयपुर में मतदान के लिए दो अलग-अलग स्थान निर्धारित किए गए हैं। जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में क्रमांक 1 से 6,613 तक हैं, वे सतीशचंद्र सभागार हॉल में मतदान करेंगे। वहीं, क्रमांक 6,614 से 14,781 तक के मतदाता गेट नंबर 2 और 4 के बीच स्थित बेसमेंट पार्किंग क्षेत्र में अपना वोट डालेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है।
सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए चुनाव क्षेत्र के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्याशियों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्प्ले स्क्रीन भी लगाई जाएगी, जिससे वे मतदान की प्रक्रिया पर नजर रख सकें। यह कदम चुनाव में विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आचार संहिता के तहत उम्मीदवारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे कोर्ट परिसर और उसके आसपास लगे अपने सभी होर्डिंग्स और पोस्टर तुरंत हटा लें। 10 अप्रैल को जारी निर्देशों के अनुसार मतदान के दिन किसी भी उम्मीदवार को चुनाव क्षेत्र के भीतर या बाहर स्टॉल या टेंट लगाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन के 200 गज के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के लिहाज से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। कोई भी मतदाता अपने साथ मोबाइल फोन, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अंदर नहीं ले जा सकेगा। यह नियम मतदान की गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है। पहचान के लिए मतदाताओं को स्टेट बार काउंसिल का आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या वोटर आईडी कार्ड साथ लाना अनिवार्य किया गया है।


